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अन्य राज्यों में भी है उत्तराखंड जैसा ढीला आपदा प्रबंधन

Thu, 04 Jul 2013 01:00 AM IST
नई दिल्ली/विनोद अग्निहोत्री
नई दिल्ली/विनोद अग्निहोत्री Updated Thu, 04 Jul 2013 01:00 AM IST
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uttarakhand disaster management situation is similar in other states

उत्तराखंड में आई प्राकृतिक आपदा में बड़ी संख्या में लोगों की मौत और नुकसान से सारा देश आहत है लेकिन ऐसी आपदाओं से निबटने की तैयारियों की हालत देश के अन्य हिस्सों में भी उत्तराखंड से ज्यादा बेहतर नहीं है।

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आपदा प्रबंधन की तैयारियों को लेकर गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, राजस्थान, तमिलनाडु जैसे बड़े राज्यों और सुनामी से एक बार बर्बाद हो चुके अंडमान निकोबार में भी कई गड़बड़ियां हैं।
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आपदा प्रबंधन के प्रति राज्य सरकारों की गंभीरता का आलम यह है कि राज्यों के आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों की सुध लेने की फुर्सत किसी भी मुख्यमंत्री को नहीं है।
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यही हाल रहा तो प्राकृतिक आपदा के मानवीय त्रासदी में बदलने की दुर्भाग्यपूर्ण कहानी कभी भी कहीं भी दोहराई जा सकती है।

समुद्र तट पर बसी मुंबई को सुनामी जैसी भयावह आपदा से बचाने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए हैं, जबकि विशेषज्ञों के मुताबिक उच्च ज्वार में अगर दो मीटर की लहरों वाली सुनामी भी उठी तो अरब सागर की प्रकृति उसे कई मीटर ऊंची लहरों में बदल सकती है।

वित्तीय कुप्रबंधन (बिना खर्च हुई अरबों रुपये की धनराशि के सही निवेश न करने) की वजह से इन राज्यों को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ और खर्च का हिसाब किताब भी नहीं मिला। अकेले आंध्र प्रदेश में चार हजार करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च का ब्यौरा नहीं दिया गया।

राज्यों में आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की वर्षों से बैठकें नहीं हुई हैं और जहां हुई हैं वहां इक्का दुक्का बैठक ही हुई है।

वहीं राज्य आपदा प्रबंधन कोष के बचे हुए धन का सही निवेश न करने से गुजरात को 189.86 करोड़, पश्चिम बंगाल को 187.80 करोड़, राजस्थान को 65.21 करोड़, उड़ीसा को 25.16 करोड़ रुपये का नुकसान पिछले कुछ वर्षों में हुआ।


नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन इंतजाम की ऑडिट रिपोर्ट में यह तथ्य सामने हैं। यह रिपोर्ट अप्रैल 2013 में संसद में पेश की गई।

रिपोर्ट के मुताबिक जिन राज्यों में आपदा प्रबंधन का ऑडिट किया गया, वहां राज्य सरकारों में आपदा प्रबंधन को लेकर कोई गंभीरता नजर नहीं आई।

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