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उत्तराखंड में आपदा पर संवेदनहीनता की हद

Tue, 02 Jul 2013 02:13 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Tue, 02 Jul 2013 02:13 AM IST
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uttarakhand disaster extent of insensitivity

उत्तराखंड में लाशों के अंबार लगे हैं तो देश के नेता इस त्रासदी पर राजनीतिक रोटियां सेंकने से बाज नहीं आ रहे।

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देश जहां इस आपदा के दर्द में डूबा है, वहीं संवेदनहीनता की हदें पार कर चुके नेता एक-दूसरे पर कीचड़ उछालने में लगे हैं। कहीं दूसरे दलों के नेताओं को उत्तराखंड जाने से रोकने के नियम बन रहे हैं तो कहीं श्रेय लेने के लिए हाथापाई तक हो रही है।

लेकिन उन शवों की चिंता शायद किसी को नहीं, जिन्हें चिता भी नसीब नहीं हो सकी, न उन बदनसीबों की जिन्होंने परिवार ही खो दिया। अपना घर बार से लेकर रोजगार तक खो चुके लोग आज दाने-दाने को तरस रहे हैं, लेकिन नेता बयानबाजी में व्यस्त हैं।
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राजनीतिक दल इस मुद्दे को आगामी लोकसभा चुनाव के नजरिए से भुनाने में जुटे हैं। पीड़ितों के जख्मों पर मरहम लगाने की बजाय नेताओं की जुबानी जंग सोमवार को भी जारी रही।
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भाजपा ने इस त्रासदी से निपटने में नाकामी का आरोप लगाते हुए उत्तराखंड की बहुगुणा सरकार को बर्खास्त करने की मांग की तो दूसरी ओर इससे तिलमिलाई कांग्रेस ने भीषण त्रासदी पर भी राजनीति करने का पलटवार विपक्षी दल पर किया। बचाव में आई कांग्रेस ने कहा कि बहुगुणा सरकार की तारीफ की जानी चाहिए।

केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी के ट्वीट से शुरू यह विवाद लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज के ट्वीट के बाद सियासी जंग में बदल गया है। सुषमा ने आरोप लगाया कि उत्तराखंड सरकार की आंख समय रहते नहीं खुली।

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