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पीएम से मिले निशंक, उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Mon, 15 Jul 2013 11:24 PM IST
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उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह से मुलाकात कर प्रदेश में राहत कार्य पूरा होने तक राष्ट्रपति शासन लगाने की भी मांग की है।
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उत्तराखंड त्रासदी के मृतकों व लापता लोगों को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने सरकार से श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है।
दूसरी ओर उत्तराखंड कांग्रेस ने निशंक की इस पहल को ढकोसला करार दिया है।
निशंक ने हिमालय के लिए अलग से नीति बनाकर हिमालय प्राधिकरण गठित करने का आग्रह किया। इस मुलाकात के बाद निशंक ने कहा कि प्रधानमंत्री ने भरोसा दिया कि उत्तराखंड के लिए पैसे की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी।
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निशंक का दावा है कि केदारघाटी की त्रासदी के बाद मौके पर पहुंचने वाले वे पहले नेता थे और तब प्रधानमंत्री को उन्होंने फोन करके सबसे पहले बता दिया था कि इस त्रासदी में हजारों लोगों के मारे जाने की आशंका है।
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निशंक ने यह भी दावा किया कि तब प्रधानमंत्री से उनसे दिल्ली आकर मिलने को कहा था। इसीलिए वे एक प्रतिनिधिमंडल के साथ पीएम से मिले।
निशंक ने पीएम से कहा कि चूंकि उत्तराखंड के पुनर्निर्माण के लिए केंद्र सरकार ने खुद एक कमेटी गठित कर ली है व खुद पीएम इसके अध्यक्ष हैं। इसलिए जब तक पुनर्निर्माण कार्य पूरा नहीं होता है, तब तक प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगा देना चाहिए क्योंकि बहुगुणा सरकार हर मोर्चे पर विफल हो चुकी है।
प्रतिनिधिमंडल ने पीएम से लगभग आधा घंटा मुलाकात कर आपदा को लेकर मुख्यमंत्री बहुगुणा और उनके मंत्रियों की ‘दास्तान’ भी सुनाई कि किस तरह आपदा में मदद करने की बजाए मंत्री हेलीकॉप्टर लेकर उड़ गए थे।
भाजपा ने कहा कि इस भयावह आपदा में कितने लोगों की मौत हुई है, कितने लापता हैं, कितने पशुओं की मौत हुई है और कितनी संपत्ति का नुकसान हुआ है, इसका सही पता लगाने के लिए श्वेत पत्र जारी किया जाना जरूरी है। निशंक के साथ टिहरी से सांसद माला राज्यलक्ष्मी शाह, पूर्व मंत्री खजान सिंह व पूर्व विधायक आशा नौटियाल भी थे।
दूसरी ओर प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धीरेंद्र प्रताप ने कहा कि निशंक की पीएम से मुलाकात वास्तव में सस्ती लोकप्रियता पाने का हथकंडा है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की बुलाई सर्वदलीय बैठक में निशंक के दिए सुझावों पर प्रदेश सरकार ने पहले ही कार्रवाई शुरू कर दी है, इसके बावजूद निशंक दिल्ली चले आए।