{"_id":"7f835630-e5a7-11e2-8462-d4ae52bc57c2","slug":"use-reasonable-force-for-evicting-illegal-occupants-of-govt-accomodation","type":"story","status":"publish","title_hn":"सरकारी बंगलों से बलपूर्वक हटवाएं कब्जा: कोर्ट","category":{"title":"India News Archives","title_hn":"इंडिया न्यूज़ आर्काइव","slug":"india-news-archives"}}
सरकारी बंगलों से बलपूर्वक हटवाएं कब्जा: कोर्ट
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Sat, 06 Jul 2013 12:47 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सुप्रीम कोर्ट ने सेवानिवृत्ति या नौकरी छोड़ने के बावजूद मंत्रियों, सांसदों, न्यायाधीशों और नौकरशाहों के सरकारी आवास खाली न करने पर गहरी चिंता जताई है।
विज्ञापन
सर्वोच्च अदालत ने प्राधिकारों को आवास खाली कराने के लिए उचित बल प्रयोग की अनुमति प्रदान की है। सर्वोच्च अदालत ने आवास खाली करने के लिए दो माह तक की समय सीमा तय की है।
विज्ञापन
फैसले के मुताबिक सरकारी आवास में रहने की पात्रता की अवधि जिनकी खत्म हो जाए, वह दो माह के तय समय में आवास खाली करें।
जस्टिस पी. सदाशिवम की अध्यक्षता वाली पीठ ने प्राधिकरणों को गैरकानूनी कब्जा जमाने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए राय भी दी है, जिसमें कहा गया है कि रिहायशी सरकारी आवासों में भविष्य में किसी भी हालत में स्मारकों को अनुमति नहीं मिलनी चाहिए।
विज्ञापन
यदि आवास में रहने वाला असली नहीं है तो 15 दिनों से ज्यादा समय उसे खाली करने के लिए नहीं दिया जाना चाहिए। इसके बाद उचित बल प्रयोग किया जाए।
यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि कर्मचारी, अधिकारी व अन्य उच्च पदाधिकारी सरकार की ओर से मिलने वाले रिहायशी आवास में लगातार रहे हैं। जबकि वह उस आवास की पात्रता भी नहीं रखते।
पीठ ने कहा कि सांसद, मंत्री और नौकरशाहों को जल्द उन स्थानों को छोड़ देना चाहिए जिनमें उनकी पात्रता खत्म हो गई है। लेकिन अदालत खाली करने के लिए तीस दिनों से ज्यादा का समय नहीं दे रही है।
न्यायपालिका का सदस्य, जज तीस दिनों के भीतर सेवानिवृत्ति के बाद आवास को खाली करें। किसी भी फोरम के जज आवास को एक माह के भीतर छोड़ें। हालांकि उचित कारण होने पर उन्हें एक और माह का समय दिया जा सकता है।
पीठ ने कहा कि इस बारे में सरकारी प्राधिकार के लिए कुछ दिशा-निर्देश तय किए ताकि अवैध रूप से सरकारी आवासों में रह रहे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सांसद और मंत्री जिस समय तक इन आवासों में रहने के हकदार होते हैं, उसके पूरा होने के बाद भी इनमें बने रहते है।
उसने कहा कि ऐसे सांसदों के खिलाफ लोकसभा के अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति को विशेषाधिकार हनन की प्रक्रिया चलानी चाहिए।
पीठ ने कहा कि सरकारी आवास खाली करने के मामले में अधिकारियों को तय तिथि से तीन माह पहले नोटिस दिया जाना चाहिए और यदि वे समय पर आवास खाली नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ उचित बल का प्रयोग किया जाना चाहिए।
अदालत ने कहा कि सरकारी आवासों में निर्धारित अवधि से ज्यादा समय तक रहना उन लोगों के अधिकारक्षेत्र पर अतिक्रमण है जिन्हें यह आवास आवंटित किए जाने हैं।