'क्षेत्रीय भाषाओं के इस्तेमाल से बढ़ेगी जीडीपी'
केंद्रीय विद्यालयों में जर्मन की जगह संस्कृत भाषा लागू करने को लेकर उठे विवाद पर मानव संसाधन विकास मंत्री ने स्मृति ईरानी ने नया तर्क दिया है।
टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक, स्मृति ईरानी ने कहा है कि क्षेत्रीय भाषाओं के इस्तेमाल से भारत की जीडीपी में उछाल आ सकता है। इतना ही नहीं उन्होंने वैज्ञानिक शब्दावलियों को भी क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवादित करने सुझाव दिया है।
वे शुक्रवार को दिल्ली के एक होटल में आयोजित विश्व हिंदू कांग्रेस की तीन दिवसीय सभा में बोल रही थीं। इस अवसर पर उन्होंने कहा वह जब भी इतिहास के बारे में बात करती हैं, मीडिया इसे हेडलाइंस बनाकर पेश करता है।
उन्होंने कहा कि इतिहास की हर बात खराब नहीं होती। क्षेत्रीय भाषाओं से जीडीपी बढ़ाने का उन्होंने तर्क भी दिया।
क्या है ईरानी का तर्क?
विश्व हिंदू कांग्रेस की सभा में बोलते हुए उन्होंने कहा कि प्राचीन भारत के पास एक महान वैज्ञानिक दिमाग था और तब लोग बौद्धिक शक्ति से संपन्न थे। उन्होंने कहा, 'हमें जरूरत है कि इस बात को जन-जन तक कैसे पहुंचाएं।'
क्षेत्रीय भाषाओं के इस्तेमाल से जीडीपी बढ़ाने का तर्क देते हुए उन्होंने सॉफ्टवेयर बनाने वाली एक बहुराष्ट्रीय कंपनी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि जब पढ़ना और लिखना क्षेत्रीय भाषाओं में होगा तो देश की जीडीपी बढ़ेगी।
आगे उन्होंने कहा कि लोगों को आंखें बंद कर वैज्ञानिक शब्दों और पद्धतियों को नहीं पढ़ना चाहिए। प्रतिदिन हमारे सामने नए शब्द आते हैं जिन्हें क्षेत्रीय भाषाओं के हिसाब से इस्तेमाल करना चाहिए।