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धार्मिक स्थलों में मुफ्त की बिजली जलाना हराम
मोहसिन पाशा/बरेली
Updated Wed, 31 Oct 2012 07:54 AM IST
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धर्मस्थलों में मुफ्त की बिजली जलाना हराम है। अगर किसी धर्मस्थल में ऐसा हो रहा है तो इसके लिए न सिर्फ उसका इंतजामिया बल्कि वहां इबादत के लिए आने वाले वे लोग भी गुनहगार हैं, जिन्हें इस बिजली चोरी की जानकारी है।
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एक सवाल के जवाब में देवबंदी मसलक ने यह फतवा जारी किया है। बरेलवी मसलक के उलमा ने भी इस बात से इत्तफाक जताया है। शहर के आजमनगर निवासी आरटीआई कार्यकर्ता मोहम्मद खालिद जिलानी ने धर्मस्थलों में मुफ्त की बिजली जलाने के बारे में फतवा मांगा था।
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सराय खाम स्थित देवबंदी मसलक के मदरसा अरबिया काशिफ उल-उलूम में उन्होंने सवाल किया था कि देश की तमाम मस्जिदों-मंदिरों, गुरुद्वारों, चर्च, खानकाहों और मजारों-मदरसों में इस्तेमाल की जानी वाली बिजली की कीमत नहीं चुकाई जाती।
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ऐसे तमाम धर्मस्थल बरेली में भी है। उनके इस सवाल पर मुफ्ती मोहम्मद मियां कासमी ने फतवा जारी किया, जिसमें कहा गया है कि मस्जिदों में मुफ्त की बिजली जलाना गैरकानूनी तो है ही, शरीयत के हिसाब से भी इसकी इजाजत नहीं है।
अगर बिजली का बिल अदा नहीं किया जाता तो इस गुनाह में उस मस्जिद की देखरेख करने वाले लोग ही नहीं, वहां इबादत के लिए आने वाले लोग भी शामिल हैं। क्योंकि इस्लाम में चोरी करना हराम है, चाहे वह किसी भी तरह की हो।
देवबंदी मसलक ही नहीं, बरेलवी मसलक के उलमा ने भी धर्मस्थलों में बिजली की चोरी को नाजायज बताया है। सौदागरान के मदरसा मंजर-ए-इस्लाम के मुफ्ती ने भी इस सवाल पर अपने फतवे में धर्मस्थलों में बिजली की चोरी को गैरकानूनी और शरीयत के नजरिए से हराम ठहराया है।
फतवे में ऐसे धर्मस्थलों का इंतजाम देखने वाले लोगों को इसके लिए जिम्मेदार बताया गया है। दोनों मसलकों से फतवा लेने से पहले आरटीआई कार्यकर्ता मोहम्मद खालिद जीलानी ने पावर कॉरपोरेशन से भी सवाल किया था कि क्या धर्मस्थलों में मुफ्त बिजली देने का कोई आदेश है तो वहां से भी जवाब आया ऐसा कोई आदेश नहीं है। इसके बाद ही उन्होंने फतवे के लिए सवाल दाखिल किए।