खुशखबरीःएच-1बी वीजा पर आउटसोर्सिंग फीस समाप्त
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के रिटर्न गिफ्त के तौर पर अमेरिका ने भारतीय आईटी कंपनियों को बड़ी राहत प्रदान की है। अमेरिकी संसद ने एच-1बी और एल1 वीजा के नाम पर कंपनियों से वसूली जाने वाली दो हजार डॉलर (करीब 130860 रुपये) की भारी-भरकम फीस खत्म कर दी है।
आउटसोर्सिंग फीस के तौर पर ली जाने वाली इस फीस के रूप में अब तक भारतीय आईटी कंपनियों ने लाखों डॉलर अमेरिकी सरकार को दिए हैं। यह फीस यूएस-मेक्सिको सीमा को अवैध आव्रजन से सुरक्षित रखने के नाम पर वसूली जाती थी। इस कानून को पांच साल की अवधि के लिए लागू किया गया था, जो बृहस्पतिवार की रात को खत्म हो गई है।
अमेरिकी संसद में 2010 में यह कानून लाया गया था। इसके तहत उन कंपनियों को यह आउटसोर्सिंग फीस भरनी पड़ती थी, जिनके 50 फीसदी कर्मचारी विदेशी हैं। इसकी जद में सबसे ज्यादा भारतीय आईटी कंपनियां आती थीं।
भारतीय आईटी कंपनियों ने प्रतिभावान भारतीय आईटी प्रोफेशनल को नौकरी देने के नाम पर थोपी जा रही इस फीस को अमेरिका का भेदभावपूर्ण रवैया करार दिया था।
नैसकॉम की पिछले महीने की रिपोर्ट में बताया गया है कि पांच साल की इस अवधि में भारतीय आईटी कंपनियों ने इस फीस के मातहत 37.5 करोड़ डॉलर अमेरिकी सरकार को दिए हैं।
भारतीय कंपनियों को बनाया गया निशाना
हाल ही के एक साक्षात्कार में नैसकॉम के प्रमुख आर चंद्रशेखर ने इस फीस को अन्यायपूर्ण करार दिया था। उन्होंने कहा था कि इस फीस का आईटी कंपनियों से कोई लेना-देना नहीं है।
उनके मुताबिक यह खास भारतीय कंपनियों को निशाना बनाते हुए लागू की गई है। भले ही एच-1बी वीजा के आवेदनों को लेकर आईटी कंपनियों पर थोपी जाने वाली यह फीस खत्म कर दी गई है, लेकिन अमेरिकी संसद फिर इसे लागू कर सकती है।
इसे फिर से लागू करने के लिए कांग्रेस के पास कानून लाने का रास्ता अभी खुला है।