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मर्दों के खुले में पेशाब करने से महिलाओं का अपमान नहींः कोर्ट

Fri, 05 Feb 2016 04:19 PM IST
Updated Fri, 05 Feb 2016 04:19 PM IST
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Urinate in the open is Wrong

खुले में पेशाब करना एक अनैतिक कृत्य हो सकता है लेकिन यह किसी महिला के सम्मान को ठेस पहुंचने का मामला नहीं है। कुछ ऐसा ही निर्णय दिया है गुजरात हाइकोर्ट ने। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार जस्टिस जेबी परदीवाला ने वडोदरा निवासी श्याम सुंदर धोबी और एक वकील चेतन गोरे के खिलाफ आईपीसी के सेक्शन 354 के तहत दर्ज मामले की सुनवाई करते हुए गुरुवार को यह निर्णय दिया।

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जानकारी के अनुसार महिला चाय विक्रेता उषा बेन ओडे ने श्याम सुंदर धोबी के खिलाफ उनकी स्टाल के निकट पेशाब करने के कारण अपने अपमान का मुकदमा दर्ज कराया था। महिला का आरोप था कि उनकी चाय के स्टाल के निकट पेशाब करने के कारण उनका अपमान हुआ है। महिला ने आरोपियों के खिलाफ धमकी देने और मारपीट करने का मामला भी दर्ज कराया था।
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मामले में कोर्ट ने सुनवाई करते हुए कहा कि किसी को बहुत आपातकालीन स्थिति में भी पेशाब आए तब भी खुले में पेशाब करना गलत है लेकिन इससे किसी को नुकसान नहीं पहुंचता और न ही यह किसी के महिला के अपमान का कारण हो सकता है।
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चाय विक्रेता महिला ने की थी शिकायत

Urinate in the open is Wrong

जानकारी के अनुसार गोरे की माता जी बीते जून में बीमारी के चलते अस्पताल में भर्ती हुई थी, उन्हें देखने के लिए ही श्याम सुंदर धोबी वहां पहुंचे थे। उन्होंने अपनी बाइक उषाबेन के चाय के स्टाल के निकट ही खड़ी की थी।

बाइक वापस उठाते समय धोबी सड़क किनारे खड़े होकर ही पेशाब करने लगे। इसी पर नाराजगी जताते हुए चाय विक्रेता उषा ने उनके खिलाफ शिकायत कर दी। कहासुनी के बाद पुलिस ने धोबी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। चाय विक्रेता महिला ने धोबी के अलावा वकील गौरे और उनके नाबालिग बेटे के खिलाफ भी धारा 354 के तहत मुकदमा दर्ज किया था। जिसमें उनके खिलाफ मारपीट और धमकी देने के आरोप भी लगाए गए थे।

मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने धारा 354 को खारिज करते हुए तीनों को आरोप मुक्त कर दिया। हालांकि धमकी देने और मारपीट करने के मामले में जांच जारी रखने का आदेश दिया है।

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