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यूपी में आरटीआई से उर्दू हो गई ‘आउट’

Wed, 24 Feb 2016 10:48 PM IST
Updated Wed, 24 Feb 2016 10:48 PM IST
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urdu out from rti in uttar pradesh

कहने के लिए तो उर्दू सूबे की दूसरी सरकारी जुबान है, लेकिन सूचना के अधिकार से उर्दू को बाहर कर दिया गया है। आरटीआई के दस साल पूरे होने पर यूपी सरकार की बनाई गई प्रथम परिनियमावली में सूचना मांगने के पत्राचार की भाषा हिंदी और अंग्रेजी कर दी गई। अन्य दूसरी भाषा में उर्दू को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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केंद्र ने 13 अगस्त 2005 को सूचना का अधिकार अधिनियम लागू कर लोगों को सूचना पाने का अधिकार दिया। इसके दस साल पूरे होने पर आरटीआई की धारा 27 का इस्तेमाल करते हुए यूपी सरकार ने 03 दिसंबर 2015 को प्रथम परिनियमावली बनाई। इस परिनियमावली में सूबे की दूसरी सरकारी जुबान उर्दू को बाहर कर दिया गया है।
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नए नियमों के मुताबिक सिर्फ हिंदी और अंग्रेजी में ही सूचना मांगी और दी जा सकती है। उर्दू ही नहीं किसी अन्य क्षेत्रीय भाषा में भी कोई आरटीआई के तहत अर्जी दाखिल नहीं कर सकता है। हिंदी और अंग्रेजी में ही सवाल-जवाब किए जाएंगे।
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गौरतलब है कि तीन दिसंबर 2015 से पूर्व उर्दू में आरटीआई दाखिल किए गए और बाकायदा सूचना भी उसी जुबान में दी गई। सरकार के नए नियम को लेकर उर्दू के कदरदानों में रोष है।

1989 में बनी थी दूसरी सरकारी भाषा

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यूपी असेंबली में 1951 में उर्दू को दूसरी सरकारी भाषा बनाने के लिए पहल की गई थी। इसे सात अक्टूबर 1989 में उर्दू को दूसरी सरकारी जुबान की मान्यता मिली। इसके मुताबिक सभी सरकारी जीओ हिंदी और अंग्रेजी के साथ उर्दू में भी जारी करना होगा।

दूसरे प्रदेशों में क्षेत्रीय भाषाओं में मिल रही सूचना

भले ही यूपी में आरटीआई से क्षेत्रीय भाषा को बाहर कर दिया गया है लेकिन देश के दूसरे सूबों में क्षेत्रीय जुबान में आरटीआई अर्जियां दाखिल की जा रही हैं और उसी जुबान में जवाब भी दिए जा रहे हैं।

अनुवाद की कापी लगानी होगी

यूपी सूचना का अधिकार नियमावली 2015 के अगर आवेदन हिंदी या अंग्रेजी से भिन्न भाषा में किए जाते हैं तो मूल आवेदन के साथ हिंदी या अंग्रेजी में सत्यापित अधिप्रमाणित अनुवाद भी संलग्न करना होगा।

‘प्रदेश सरकार उर्दू को लेकर दोहरा मापदंड अपना रही है। एक ओर महत्वपूर्ण जीओ और कागजात को उर्दू में प्रकाशित करने फरमान जारी किए जाते हैं, दूसरी ओर आरटीआई से उर्दू को बेदखल कर दिया गया है। जबकि उर्दू सूबे की दूसरी सरकारी भाषा है।’
- सलीम बेग (आरटीआई कार्यकर्ता)

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