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अनंतमूर्ति ने नरेंद्र मोदी पर फिर हमला बोला

Sun, 22 Sep 2013 09:08 PM IST
अमर उजाला, दिल्ली
अमर उजाला, दिल्ली Updated Sun, 22 Sep 2013 09:08 PM IST
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ur ananthamurthy again criticise narendra modi

ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित लेखक यूआर अनंतमूर्ति ने भाजपा के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर नए सिरे से हमला बोला है।

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मोदी के प्रधानमंत्री बनने पर भारत छोड़ने की बात कर विवाद खड़ा करने वाले लेखक का कहना है कि हिंदुत्व की समझ न होने के कारण मोदी इस धर्म की विविधता को खत्म कर देंगे।

अपनी तीखी आलोचना से नाराज अनंतमूर्ति ने भाजपा पर भी निशाना साधा। पार्टी नेताओं पर फूहड़ प्रतिक्रिया व्यक्त करने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा ऐसी पार्टी है, जो बौद्धिक असहमति तक बर्दाश्त नहीं कर सकती।
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मोदी के प्रधानमंत्री बनने पर भारत छोड़ देने की बात करने वाले अनंतमूर्ति ने मोदी पर नए सिरे से पहले से भी तीखा हमला बोला है।

उन्होंने मोदी को दिखावा पसंद और बौद्धिक रूप से खोखला व्यक्ति करार देते हुए कहा कि चूंकि उन्हें हिंदुत्व की समझ नहीं है, ऐसे में वह इस धर्म की विविधता को नष्ट कर देंगे।
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अनंतमूर्ति ने कहा कि दरअसल हिंदुत्व की मूल समावेशी अवधारणा, इसकी विविधता और सैकड़ों तरह की सोच ने इस जीवन दर्शन का निर्माण किया है। मोदी को इसकी समझ नहीं है। जाहिर है कि सत्ता के शीर्ष पर आने के बाद वह हिंदुत्व की इस खूबसूरती को नष्ट कर देंगे।

इस दौरान लेखक ने अपने बयान की भाजपा की ओर से तीखी आलोचना पर भी पलटवार किया। उन्होंने कहा कि मैंने तो नेहरू और इंदिरा गांधी का भी कड़ा विरोध किया था। मगर आज तक कांग्रेस के किसी नेता ने भाजपा नेताओं की तरह फूहड़ प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की।

भाजपा नेताओं का ऐसा आचरण बताता है कि इस पार्टी को बौद्धिक असहमति भी बर्दाश्त नहीं है। इस दौरान अनंतमूर्ति मोदी के प्रधानमंत्री बनने पर देश छोड़ने की अपनी बात पर कायम रहे।

उन्होंने कहा कि मोदी बौद्धिक रूप से खोखले व्यक्ति हैं। गुजरात दंगे के दशक भर बाद भी वह कहते हैं कि कुत्ते का बच्चा भी गाड़ी के नीचे आ जाता है, तो अफसोस होता है। इससे पता चलता है कि वह जड़ व्यक्ति हैं।


उन्होंने कहा कि वह खुद को अंतरंग आलोचक मानते हैं। इसलिए हमेशा कांग्रेस विरोधी रहा।

एक समय जयप्रकाश नारायण की भी आलोचना की। क्योंकि उनकी समावेशी नीति का फायदा भाजपा ने उठाया। इसी प्रकार मैंने राममनोहर लोहिया की अवधारणा पर भी सवाल उठाए थे।

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