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अंग्रेजी में ही करना पड़ा अंग्रेजी का विरोध

Fri, 15 Mar 2013 11:19 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Fri, 15 Mar 2013 11:19 PM IST
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upsc new merit system rocks parliament

सिविल सेवा परीक्षाओं में अंग्रेजी अनिवार्य बनाने संबंधी अधिसूचना पर लोकसभा में भारी हंगामे के बाद हुई चर्चा में कई अनोखे दृश्य देखने को मिले।

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क्षेत्रीय भाषाओं के लिए अनुवादकों की व्यवस्था न होने के कारण कई सांसदों को अंग्रेजी का विरोध अंग्रेजी में ही करना पड़ा।

इतना ही नहीं सरकार की ओर से कार्मिक राज्यमंत्री वी. नारायण सामी ने जवाब की शुरुआत तो पूरे जोश के साथ हिंदी में की, लेकिन सदस्यों को न समझा सकने की मजबूरी अंतत: उन्हें भी अंग्रेजी की पटरी पर ले आई।
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इसके अलावा हमेशा अंग्रेजी में ही अपनी बात रखने वाले सदस्यों द्वारा हिंदी में विरोध जताने से सदन देर तक हिंदीमय बना रहा। सदन में बांग्ला, पंजाबी जैसे कई क्षेत्रीय भाषाओं की भी गूंज सुनाई दी।
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हंगामे के बाद शून्यकाल में हुई चर्चा के दौरान उस समय अजीबोगरीब स्थिति उत्पन्न हो गई जब कई सदस्यों को अंग्रेजी का विरोध अंग्रेजी में करना पड़ गया। चूंकि लोकसभा में तमिल, उड़िया जैसी क्षेत्रीय भाषाओं के लिए अनुवादकों का प्रबंध नहीं है।

इसलिए बीजू जनता दल के तथागत सत्पथी, डीएमके के टीकेएस इलानगोवान और एआईएडीएमके के डॉ. एम. थम्बीदुरई को अंग्रेजी में अंग्रेजी का विरोध जताना पड़ा। हालांकि इस दौरान इन सदस्यों ने अनुवादक की व्यवस्था न होने की पीड़ा दर्शाते हुए अंग्रेजी में ही बात रखने की मजबूरी पर अपनी सफाई भी दी।

सबसे मजेदार वाकया तब सामने आया जब सरकार की ओर से जवाब देने के लिए नारायण सामी खड़े हुए। जवाब हिंदी में शुरू करने के कारण उनका जोरदार स्वागत हुआ, लेकिन इस भाषा की कम जानकारी होने के कारण वह हिंदी में सदस्यों को नहीं समझा पाए कि सरकार ने अंग्रेजी को अनिवार्य बनाने वाली अधिसूचना को स्थगित करने का फैसला किया है।


इसके बाद उन्हें यह कहते हुए मजबूरी में अंग्रेजी की पटरी पर उतरना पड़ा कि अभी हम अंग्रेजी में बोलेगा तभी सब को समझ में आएगा।

चर्चा के दौरान उस समय सारा सदन हिंदीमय हो गया जब हमेशा अंग्रेजी में अपनी बात रखने वाले माकपा के बासुदेव आचार्य, भाकपा के गुरुदास दासगुप्ता, तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय सहित कुछ अन्य गैर हिंदी भाषी सांसदों ने हिंदी में अपनी बात रखने हुए अंग्रेजी को अनिवार्य बनाने का विरोध किया।

अपनी बात रखते हुए दासगुप्ता ने वित्त मंत्री पी. चिदंबरम पर अंग्रेजी को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। इसके अलावा उन्होंने हिंदी में बात रखने पर अंग्रेजी मीडिया में जगह न मिलने की भी शिकायत की।

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