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सरकार के लॉलीपॉप से क्यों नाराज हैं छात्र?

Tue, 05 Aug 2014 06:47 PM IST
Updated Tue, 05 Aug 2014 06:47 PM IST
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upsc aspirants slam measures by govt ap

केंद्र सरकार ने सी-सैट विवाद को खत्म करने के लिए यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में अंग्रेजी के अंकों को ग्रेडिंग या मेरिट में शामिल नहीं किए जाने का सुझाव दिया है।

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सरकार ने 2011 में सिविल सेवा परीक्षा दे चुके उम्मीदवारों को 2015 की परीक्षा में शामिल होने का एक और मौका देने की भी घोषणा की है।

सरकार के सुझावों पर यूपीएससी की मुहर लग जाती है तो प्रारंभिक परीक्षा में 400 के बजाय 380 अंकों के आधार पर मेरिट लिस्ट तैयार होगी। हालांकि, सी-सैट का विरोध कर रहे छात्र सरकार के सुझावों से सहमत नहीं हैं। वे सी-सैट को खत्म करने की मांग कर रहे हैं।
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छात्रों का कहना, सरकार ने धोखा दिया

upsc aspirants slam measures by govt ap

प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने केंद्र के सुझावों को खारिज कर दिया है। छात्रों का कहना है कि सरकार ने उन्हें धोखा दिया है।

एक छात्र के मुताबिक, सी-सैट के पेपर में अंग्रेजी कॉम्प्रीहेन्‍शन का सेक्‍शन ही नहीं, हिंदी अनुवाद भी एक समस्या हैं। अनुवाद ऐसे होते हैं कि हिंदी के छात्र क्या, प्रोफेसर भी नहीं समझ पाएंगे।

छात्रों का कहना है कि वे अंग्रेजी के विरोधी नहीं हैं, लेकिन तकनीकी, प्रबंधन के छात्रों को मिलने वाली वरीयता के खिलाफ हैं।

छात्रों के खिलाफ हो रही साजिश

upsc aspirants slam measures by govt ap

व‌हीं, सिविल सेवा की तैयार कर रहे है एक परीक्षार्थी विवेक का कहना है कि सी-सैट पर सरकार ने सदन में जो फैसला दिया है, यह छात्रों के खिलाफ हो रही साजिश को और मजबूती प्रदान करता है।

विवेक मुताबिक, सरकार बेशक सी-सैट पेपर में अंग्रेजी कॉम्प्रीहेन्‍शन के नौ प्रश्नों के साढ़े 22 नंबरों को मेरिट में नहीं जोड़ने की बात कर रही है, लेकिन हिंदी कॉम्प्रीहेन्‍शन के 30- 36 प्रश्न जो कि हिंदी भाषा के आते हैं, उनका अनुवाद कठिन होता है। यह प्रश्न हिंदी समेत क्षेत्रीय भाषी क्षेत्रों से आने वाले परीक्षार्थियों की मूल भावना के विपरीत है।

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'अतिरिक्त मौका देने से क्या फर्क पड़ता है'

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सरकार ने 2011 में परीक्षा दे चुके अभ्यिर्थियों को 2015 में एक और मौका देने का सुझाव दिया है। एक प्रदर्शनकारी छात्र का कहना है कि सरकार का ये सुझाव धोखा भर है। एक अतिरिक्त मौका देने से क्या फर्क पड़ता है, जबकि परीक्षा का प्रारूप वहीं पुराना है।

छात्रों का कहना है कि केंद्र ने उनकी एक भी मांग मानी नहीं हैं। छात्र परीक्षा के पुराने प्रारूप को लागू करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि सी-सैट को या तो खत्म कर दिया जाए या वैकल्पिक बना दिया जाए।

छात्रों का कहना है कि सिविल सेवा में किसी भी स्तार पर अंग्रेजी का परीक्षण नहीं किया जाना चाहिए। ऐसा करना दूसरे माध्यम के छात्रों के साथ भेदभाव है। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि यूपीएससी परीक्षा पास करने वालों छात्रों को बाद में अंग्रेजी का प्रॉफिसियेंशी कोर्स करा सकते हैं।

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