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UPPSC लोवर सब-ऑर्डिनेट: SC में सरकार ने दी यह दलील

Fri, 31 Jan 2014 09:23 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 31 Jan 2014 09:23 PM IST
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uppsc lower subordinate exam petition in supreme court

सुप्रीम कोर्ट से यूपीपीएससी लोवर सब-ऑर्डिनेट परीक्षा पर लगी रोक हटाने का आग्रह करते हुए उत्तर प्रदेश और राज्य आयोग ने कहा है कि तय उम्र सीमा में छूट के मसले पर दायर याचिका के आधार सच से परे और झूठे हैं।

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क्योंकि इस परीक्षा के आयोजन से पहले ही राज्यपाल की ओर सभी सरकारी नौकरियों में आवेदन के लिए निर्धारित आयु में पांच साल की छूट प्रदान की गई थी।

प्रदेश सरकार की ओर से इस संबंध में जून, 2012 में अधिसूचना भी जारी की गई थी। इस अधिसूचना में स्पष्ट किया गया था कि अभ्यर्थियों की उम्र सीमा को 35 से बढ़ाकर 40 कर दिया गया है।

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अदालत में हलफनामा पेश

uppsc lower subordinate exam petition in supreme court

सर्वोच्च अदालत ने 17 जनवरी को अभ्यर्थी सुनील कुमार रे की विशेष अनुमति याचिका पर 19 जनवरी को यूपीपीसीएस की ओर से आयोजित लोवर सब-ऑर्डिनेट परीक्षा पर रोक लगाने का आदेश दिया था।

जस्टिस एआर दवे की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष यूपी सरकार और राज्य आयोग की ओर से हलफनामा पेश किया गया।

प्रदेश सरकार और राज्य आयोग ने हलफनामे में याचिकाकर्ता की ओर से लगाए गए सभी आरोपों को नकारते हुए कहा है कि वर्ष 2000 में यूपीपीएससी नियम 1972 में 8वां संशोधन कर उम्र सीमा को 32 से बढ़ाकर 35 किया गया था।

याचिकाकर्ता ने गलत जानकारी दी

uppsc lower subordinate exam petition in supreme court

इसके बाद 2009 से 2012 के बीच इस परीक्षा का आयोजन न कराया जाना कानूनी समीक्षा के दायरे में है।

जबकि 2013 में इस परीक्षा को कराने के लिए जारी किए गए विज्ञापन से पहले ही जून, 2012 में उम्र सीमा को 35 से बढ़ाकर 40 कर दिया गया।

अधिवक्ता एमआर शमशाद की ओर से दायर राज्य के हलफनामे के मुताबिक पांच साल की छूट 2009 से 2012 तक परीक्षा न कराए जाने समेत अन्य पहलुओं को ध्यान में रखकर ही की गई।

लेकिन याचिकाकर्ता की उम्र 40 पार हो चुकी है। ऐसे में वह इस परीक्षा में शामिल होने की योग्यता खो चुका है। उसकी ओर से अदालत को गलत जानकारी दी जा रही है।

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क्या है दलील?

uppsc lower subordinate exam petition in supreme court

याचिकाकर्ता का यह दावा पूरी तरह से निराधार है कि वह 1992 के नियमों के तहत छूट पाने के योग्य है। क्योंकि उम्र सीमा को 1972 के नियमों में संशोधन कर बढ़ाया गया है।

1992 के नियम सिर्फ मानवीय आधारों के मामलों में लागू होता है। सामान्य नियुक्तियों के लिए इसका दावा नहीं किया जा सकता।

वहीं राज्य आयोग ने स्पष्ट किया है कि गत वर्ष 1 जुलाई को याचिकाकर्ता 40 की उम्र पार कर चुका था और 2009 में 35 की उम्र पार कर चुका था।

2009 से 2012 के बीच यदि तीन परीक्षाओं का आयोजन होता, तब भी वह निर्धारित उम्र 35 पार कर चुका था।

कानूनी विवाद का घटनाक्रम

uppsc lower subordinate exam petition in supreme court

सर्वोच्च अदालत ने 17 जनवरी 2014 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की बेंच के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी। दरअसल हाईकोर्ट की डबल बेंच ने गत वर्ष 4 दिसंबर को सिंगल बेंच के आदेश के अनुपालन और उसे लागू करने पर रोक लगा दी थी।

सिंगल बेंच ने यूपीपीएससी को निर्देश दिया था कि गवर्नर के पास उम्र की तय सीमा से छूट देने का अधिकार है।

ऐसे में आयोग परीक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ा दे या उम्र की तय सीमा पार कर चुके अभ्यर्थियों को तब तक के लिए अनुमति प्रदान कर दे, जब तक कि गवर्नर की ओर से कोई निर्णय नहीं लिया जाता।

इसके लिए सिंगल बेंच ने दो माह का समय निर्धारित कर दिया। इसके खिलाफ आयोग ने डबल बेंच में याचिका दायर की और अंतरिम आदेश पर डबल बेंच ने रोक लगा दी थी।

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