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उपहार सिनेमा कांड: बनना था पायलट, चला रहा है टैक्सी

Wed, 19 Aug 2015 09:43 PM IST
राकेश भट्ट/ अमर उजाला, नई दिल्ली
राकेश भट्ट/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 19 Aug 2015 09:43 PM IST
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uphar cinema case: wasted lives,  he should be a pilot, but now he is driving cab

पाकिस्तान ने हमला कर दिया है...गांव खाली कराओ..। उपहार सिनेमा में बॉर्डर फिल्म के इस सीन के साथ ही गोलाबारी तेज हुई तो बालकॉनी में धुआं भरना शुरू हो गया। पहले मुझे व मेरे दोस्तों को लगा कि फिल्म में चल रहे सीन का अहसास है लेकिन ज्यों ही दम घुटने लगा और लोग गिरने लगे सारा माजरा समझ में आ गया।

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कुछ मिनट पहले ही फिल्म के बीच में टॉयलेट जाना काम आया और अंधेरे में धुएं को चीरते हुए दरवाजे के बाहर निकल गया। ऊपर से कूदा और अंदर दर्शकों की स्थिति जानते हुए सिनेमा हॉल की एंट्री प्वाइंट पर शीशे की दीवार को तोड़कर धुआं बाहर निकाला।
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13 जून वर्ष 1997 का दिन उन सैकड़ों परिवारों को अभी भी डराता है जिन्होंने उपहार सिनेमा अग्निकांड में अपनों को खोया या मौत के मुंह से जैसे तैसे बचे। ऐसे ही एक चश्मदीद है महरन नगर पालम निवासी प्रमोद कुमार।
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सजा कायम रहनी चाहिए थी

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प्रमोद के अनुसार सिनेमा हॉल प्रबंधन की लापरावाही से राष्ट्रीय खिलाड़ी से मैं टैक्सी का स्टेयरिंग थामने को मजबूर हो गया। अन्य परिवारों की भी ऐसी ही कहानी है। लापरवाही तो सामने आ ही गई थी, ऐसे में तीस-तीस करोड़ जुर्माने पर अंसल बंधुओं को छोड़ देना 59 लोगों की मौत का न्याय नहीं कहा जा सकता।

ऐसे में कम से कम पूर्व की सजा तो कायम रखनी चाहिए थी।एयर इंडिया की तरफ से आयोजित दौड़ में तीन मेडल, रथ मैराथन सहित कई राष्ट्रीय प्रतियोगिता में में नाम कमाने वाले उस समय पर 24 वर्ष के रहे प्रमोद के अनुसार व अपने दोस्त राजेश, अतुल व गायत्री के साथ उस दिन बॉर्डर फिल्म देखने गए थे।

इंटरवल से कुछ मिनट पहले मुझे टॉयलेट जाना पड़ा। आकर वापस बैठा तो फिल्म में सनी देयोल पाकिस्तान हमले की सूचना देते हुए सुनील शेट्टी को गांव खाली कराने भेजते हैं। इस दौरान गोलाबाजी की आवाज व आग के सीन पर्दे पर दिखने लगते हैं।

सारे सपने बिखर गए

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कुछ ऐसा ही उसी समय सिनेमा हॉल के अंदर हुआ। लाइट जाने पर जेनरेटर चलने लगा और ट्रांसफारमर में आग लग गई। फिल्म देखते-देखते बॉलकनी में धुआं भरने लगा तो एक बार तो लगा कि पर्दे पर चल रहे सीन का असर है लेकिन जब सांस लेने में दिक्कत हुई तो इसी दौरान आग-आग का शोर मचा।

टॉयलेट से आना काम आया तो धुआं भरने के बावजूद अंदाजे से मैं बाहर भागा। दरवाजे के पास लगे शीशे के दरवाजे को तोड़ा तो कोहनी में चोट लग गई।

इसके बाद खिड़की से देखा तो नीचे गद्दे वाली दुकान चलाने वाले ने अपने गद्दे लोगों की जान बचाने के लिए बिछा दिए। एथलीट होने का फायदा उठाते हुए मैंने फुर्ती दिखाई और गद्दों पर कूद गया।

नीचे कूदने के बाद समय न गंवाते हुए एंट्री पर लगी शीशे की दीवार को कुर्सी मारकर मैंने स्वयं तोड़ा और धुएं का गुबार बाहर निकला।

पब्लिक व फायर ब्रिगेड़ की मदद से करीब डेढ़ सौ लोगों को बाहर निकाला गया इनमें अधिकांश बेहोशी की हालत में थे। क्या बताऊं साहब इसके बाद स्वास्थ्य के साथ न देने व कोर्ट कचहरी के चक्कर काटने पर मेरा करिअर ही बर्बाद हो गया।

एथलीट कोटे से एयर इंडिया में भर्ती होने वाला था लेकिन इस कांड के बाद सारे सपने बिखर गए। अब एयरपोर्ट पर टैक्सी चलाकर अपने परिवार का पालन पोषण करता हूं।

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