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यूपीए का तीसरा ट्रंप कार्ड, हर भूमिहीन को जमीन
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
Updated Thu, 14 Mar 2013 12:33 PM IST
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यूपीए सरकार ने 2014 के लोकसभा चुनावों की तैयारियां शुरू कर दी है। चुनावी तैयारियों के तहत सरकार ने भूमि सुधार कानून के मसौदे को अंतिम रूप दे दिया है। सरकार इस कानून को मानसून सत्र में संसद में पेश करने की तैयारी में है।
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इस कानून के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले भूमिहीन परिवारों को घर बनाने और आमदनी के लिए जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। कानून के तहत भूमिहीन गरीबों को कम से कम 0.1 एकड़ या 4356 वर्ग फीट के बराबर जमीन दी जाएगी।
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भूमि सुधार कानून का मसौदा केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश की अध्यक्षता में गठित विशिष्ट समिति ने तैयार किया है। यूपीए के अन्य मंत्रियों की प्रतिक्रिया के लिए इस मसौदे को 18 मार्च को सभी के पास भेजा जाएगा।
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गौरतलब है कि भूमि सुधार कानून पिछले वर्ष आदिवासियों को लेकर दिल्ली कूच करने वाली एकता परिषद की मांग का हिस्सा है।
एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने कहा कि इस कानून का मसौदा एकता परिषद के सुक्षावों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
जानकारों की मानें तो महंगाई और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर यूपीए को शहरी मतदाताओं के उससे हटने की आशंका है। इसलिए सरकार का फोकस अब ग्रामीण मतदाताओं पर है। वह ग्रामीण वोटरों को अपने पक्ष में करने के लिए भूमि सुधार कानून को ला रही है।
मनरेगा से साधा था 2009 का लक्ष्य
यूपीए-1 सरकार ने 2 फरवरी 2006 को मनरेगा योजना शुरू की थी। पहले यह योजना देश के 100 जिलों में लागू की गई। इसके बाद 200 जिलों में इसका दायरा बढ़ाया गया। अब यह योजना देश के हर जिले में लागू है। योजना के तहत गरीब परिवार के एक सदस्य को साल में कम से कम 100 दिन का रोजगार गारंटी से देने का प्रावधान है। सरकार को 2009 के लोकसभा चुनावों में इस योजना का काफी लाभ मिला था। सरकार आगामी चुनावों में भी 2009 के नतीजों को दोहराने की कोशिश में है।
कैश सब्सिडी से बीपीएल परिवारों को लुभाया
वर्तमान यूपीए सरकार ने कैश सब्सिडी योजना लाकर ग्रामीण और मिडिल क्लास वोटरों को अपने लुभाने की कोशिश की है। इस योजना में बीपीएल परिवारों को अनाज, खाद और केरोसीन आदि पर सब्सिडी देने के बजाए सरकार सीधे लाभार्थी के बैंक अकाउंट में कैश पहुंचाएगी। सब्सिडी के बराबर का कैश मिलने के बाद लोगों को बाजार भाव पर ही चीजें खरीदनी होंगी। इस स्कीम के तहत हर बीपीएल परिवार को हर महीने करीब 3 से हजार रुपये मिलेंगे।