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सपा और बसपा से सरकार की उम्मीद कायम

Thu, 02 May 2013 12:06 AM IST
धीरज कनोजिया/नई दिल्ली
धीरज कनोजिया/नई दिल्ली Updated Thu, 02 May 2013 12:06 AM IST
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upa govt survival hinges on sp, bsp support

कोयला घोटाले में सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद पंगु बनी सरकार अब सपा और बसपा को ही संकटमोचक मान रही है। यूपीए के मैनेजरों को दोनों से राहत की उम्मीद है।

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दोनों के बलबूते ही वह संसद में आगे के कामकाज और खुद को बहुमत में दिखाने की हिम्मत रखे हुए है।

टिप्पणी के बाद समाजवादी पार्टी में सरकार को लेकर रवैया नरम गरम जैसा है। मगर बसपा भाजपा को कटघरे में खड़े कर सरकार के साथ होने का संकेत दे रही है।

बीते मंगलवार को वित्तीय कामकाज निपटाने के समय लोकसभा में ज्यादातर दलों ने सरकार के खिलाफ वाकआउट किया। मगर सपा और बसपा के सदस्य सदन में ही जमे रहे।

सरकार इसे अपने पॉलिटिकल मैनेजमेंट की सबसे बड़ी जीत मान रही है। उसकी कोशिश है कि दोनों सदन के अंदर भाजपा के हंगामे का विरोध कर संसद को चलाने की पैरवी करें। इसी सिलसिले में बातचीत का दौर जारी है।
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सरकार को उम्मीद है कि उसे कामयाबी मिलेगी। उसके लिए राहत की बात यह भी है कि कोर्ट के सख्त रुख के बाद सपा ने सरकार के खिलाफ आक्रामक होने से परहेज किया।

सपा महासचिव रामगोपाल यादव का कहना था कि कोर्ट ने टिप्पणी की है। यह कोई फैसला नहीं है। फैसला आने के बाद विचार किया जाएगा। मगर बुधवार को सपा ने सरकार पर सीबीआई के दुरुपयोग करने का आरोप जरूर लगाया।
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सपा नेता नरेश अग्रवाल ने कहा कि कोर्ट की बात से सरकार द्वारा सीबीआई के दुरुपयोग होने की बात सच हो जाती है। सरकार के रणनीतिकार लेकिन सपा के इस नरम गरम रवैये से कोई खास चिंतित नहीं है। उसको उम्मीद है कि सपा संसद के अंदर सरकार के पक्ष में बैटिंग करेगी।

दूसरी तरफ ऐसी ही अपेक्षा सरकार और कांग्रेस बसपा से भी कर रही हैं। कोर्ट की राय आने के बाद मायावती ने कहा था कि सीबीआई का दुरुपयोग होता है। एनडीए सरकार के दौरान भी उनके खिलाफ सीबीआई का दुरुपयोग किया गया था।


कोर्ट ने बिलकुल सही दिशा में अपनी बात रखी है। मायावती की इस राय को मैनेजर सरकार के खिलाफ नहीं मान रहे हैं। उनका कहना है कि अगर सपा और बसपा हमारे साथ नहीं होती तो उसी दिन लोकसभा से वाकआउट कर जातीं। इस भरोसे के बाद भी रणनीतिकार काफी सतर्क हैं। दोनों पार्टियों के शीर्ष नेताओं से संपर्क रखा जा रहा है।

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