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अलग तेलंगाना राज्य पर उलझी कांग्रेस

Mon, 29 Jul 2013 12:29 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Mon, 29 Jul 2013 12:29 AM IST
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upa coordination panel to meet on telangana

अलग तेलंगाना राज्य के मुद्दे पर उलझी कांग्रेस ने विवाद का हल निकालने के लिए यूपीए समन्वय समिति की बैठक बुलाने का फैसला किया है।

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बैठक 31 जुलाई को बुलाई गई है। इस बैठक के तत्काल बाद सेंट्रल वर्किंग कमेटी (सीडब्ल्यूसी) की बैठक बुलाने की योजना है।

उधर, पार्टी में तेलंगाना के समर्थन और विरोध के सवाल पर रस्साकसी जारी है। तेलंगाना क्षेत्र के सांसद और विधायक अलग राज्य न बनने पर इस्तीफे की धमकी दे रहे हैं तो दूसरी ओर संयुक्त आंध्र प्रदेश के समर्थक विधायक और सांसद अलग राज्य बनने पर इस्तीफा देने की बात कह रहे हैं।

केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल आंध्र प्रदेश के चार मंत्री और दो सांसद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिल कर अलग तेलंगाना राज्य के गठन पर अपना विरोध जता चुके हैं।
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बहरहाल, सरकारी सूत्रों का कहना है कि 31 जुलाई की बैठक में इस संबंध में अंतिम निर्णय लिए जाने की उम्मीद है। वैसे इस बारे में घोषणा मानसून सत्र में ही किए जाने की संभावना है।
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दरअसल अलग तेलंगाना राज्य के गठन के सवाल पर कांग्रेस में ही मतभेद उभर आए हैं। पार्टी नेतृत्व आंध्र प्रदेश तथा तेलंगाना क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों के अलग-अलग रुख से परेशान है।

कांग्रेस सूत्रों ने बताया कि अब पार्टी नेतृत्व ने इस मुद्दे पर यूपीए के घटक दलों की भी राय जानने की रणनीति बनाई है। इसके तहत 31 जुलाई को यूपीए समन्वय समिति की बैठक बुलाई गई है।

इस बैठक के ठीक बाद सीडब्ल्यूसी की बैठक बुलाए जाने की योजना है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक ये दोनों बैठक अहम हैं और इनमें तेलंगाना के बारे में अंतिम फैसला लिया जा सकता है।

अलग तेलंगाना राज्य के गठन का लगभग फैसला कर चुके पार्टी नेतृत्व की परेशानी अलग राज्य के विरोधियों ने बढ़ा दी है।

राज्य से आने वाले केंद्रीय मंत्रिमंडल के सदस्य एम. पल्लमराजू, केएस राव, चिरंजीवी और डी. पुरंदेश्वरी के अलावा दो सांसद के. बापीराजू और अनंतरामी रेड्डी ने प्रधानमंत्री से मिल कर अलग तेलंगाना राज्य के गठन का विरोध किया है।

सूत्रों के मुताबिक इन मंत्रियों और सांसदों ने अलग तेलंगाना राज्य का गठन होने पर इस्तीफे की धमकी दी है। इसके बाद ही पार्टी नेतृत्व ने यूपीए समन्वय समिति और सीडब्ल्यूसी की बैठक बुलाने की रणनीति बनाई।

इधर कुआं, उधर खाई
तेलंगाना के मुद्दे पर फैसला लेने में कांग्रेस को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति ऐसी हो गई है कि पार्टी जो भी निर्णय लेगी उसके अपने लोग ही उसके विरोध में खड़े हो जाएंगे।

इस मुद्दे पर आंध्र प्रदेश के कांग्रेसी सांसद और विधायक दो खेमे में बंटे हुए हैं।

तेलंगाना क्षेत्र के सांसद और विधायक अलग राज्य नहीं बनने पर इस्तीफे की धमकी दे रहे हैं तो संयुक्त आंध्र प्रदेश के समर्थक अलग राज्य बनाए जाने पर इस्तीफे की धमकी दे रहे हैं।

'सत्ता में आए तो तेलंगाना का गठन कर देंगे'
इधर भाजपा ने तेलंगाना के जल्द गठन पर जोर दिया है। पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा कि अगर भाजपा सत्ता में आती है तो पृथक राज्य तेलंगाना का गठन कर दिया जाएगा।


वहीं भाजपा के उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के 24 घंटे के अंदर तेलंगाना का गठन कर दिया जाएगा।

भाजपा ने कांग्रेस पर इस मुद्दे पर राजनीतिक उठापटक कराने और राज्य के गठन पर गंभीर नहीं होने का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि तेलंगाना की मांग न्यायोचित है तथा भाजपा तेलंगाना को पूर्ण राज्य बनाये जाने की पक्षधर है।

भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह पार्टी के अनुसूचित जाति मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में भाग लेने के बाद तेलंगाना के गठन पर जोर दिया।

सिंह का यह बयान उस समय आया है जब कांग्रेस ने तेलंगाना मसले पर निर्णय लेने के लिए 31 जुलाई को यूपीए समन्वय समिति की बैठक बुलाई है।

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