पुलिस की गलती से हुआ कांठ में बवाल
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अकबरपुर चैदरी गांव के मंदिर पर लगे लाउडस्पीकर को उतारना गलत फैसला था। प्रशासन जिसे नई परंपरा मान रहा है वहां पिछले पंद्रह साल से लाउडस्पीकर लगा था।
सुबह शाम इसे बजाया जाता था। गांव में किसी को इस पर आपत्ति नहीं थी लेकिन पुलिस और प्रशासन ने सियासी प्रेशर में जबरदस्ती उतरवा दिया। इतना ही नहीं विरोध करने पर दलित परिवारों के साथ ज्यादती की गई। महिलाओं पर लाठीचार्ज किया गया।
मंगलवार को पहुंची अनुसूचित जाति जनजाति आयोग की टीम ने गांव का दौरा करने के बाद यह रिपोर्ट बनाई है। आयोग के अफसरों का कहना है कि जरूरत पड़ने पर डीएम और एसएसपी को दिल्ली बुलाया जाएगा।
ये है पुलिस अधिकारियों का बयान
केंद्रीय अनुसूचित जाति जनजाति आयोग की टीम मंगलवार को मुरादाबाद पहुंची। डायरेक्टर कौशल कुमार और अनुसंधान अधिकारी एपी गौतम ने पहले सर्किट हाउस में डीएम चंद्रकांत और एसएसपी धर्मवीर सिंह से बात की।
अफसरों का पक्ष था कि मंदिर पर लाउडस्पीकर लगाकर नई परंपरा डाली जा रही थी जिस पर दूसरे वर्ग को आपत्ति थी। करीब पंद्रह दिनों से लोगों को समझाया जा रहा था। मगर बात नहीं बनी।
जब पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मंदिर से लाउडस्पीकर उतारने पहुंचे तो लोगों ने विरोध किया मगर फिर भी लोगों को समझाबुझाकर शांत किया गया। अफसरों ने लाठीचार्ज या फिर बल प्रयोग से इंकार किया है। वहीं जब आयोग की टीम गांव पहुंची तो वहां लोगों ने अपना पक्ष रखा।
ये हैं गांव वालों के बयान
:- मंदिर चालीस साल पुराना है
:- मंदिर पर पंद्रह साल से माइक लगा था
:- होली पर माइक खराब हो गया था
:- सही कराकर दोबारा लगाया गया था
:- गांव में लाउडस्पीकर पर किसी को आपत्ति नहीं थी
:- पुलिस-प्रशासन ने मिलकर जबरन उतरवाया
:- पुलिस ने गांव वालों पर लाठीचार्ज किया
:- घरों से लोगों को पकड़कर जेल भेज दिया
:- अभी तक अधिकारी गांव वालों को धमका रहे हैं
:- डर के मारे ग्रामीण पलायन कर गए हैं
विधान परिषद में गूंजा कांठ का मुद्दा
अकबरपुर चैदरी गांव में मंदिर से जबरन लाउडस्पीकर उतारे जाने का मुद्दा यूपी की सियासत को गरमाने लगा है। मंगलवार को विधान परिषद में भी यह मुद्दा उठा।
बसपा के सदस्यों ने काफी देर तक हंगामा किया। इन लोगों का आरोप था कि पुलिस प्रशासन के इशारे पर दलितों का उत्पीड़न किया गया है। महिलाओं पर लाठीचार्ज हुआ है।
मंदिर से लाउडस्पीकर उतारने का विरोध करने वालों पर लाठीचार्ज की जांच डीआईजी स्तर के अफसर से कराई जाएगी।विधान परिषद में मंगलवार को सभापति गणेश शंकर पांडेय ने यह भरोसा दिया।
डीआईजी स्तर के अधिकारी से जांच कराने का निर्देश
यूपी की सियासत में यह मुद्दा इन दिनों सुर्खियों में हैं। नेता प्रतिपक्ष नसीमुद्दीन सिद्दीकी, बसपा के लोकेश प्रजापति, सुनील कुमार चित्तौड़ और अन्य सदस्यों ने मंगलवार को यहां कार्यस्थगन सूचना के जरिये मुरादाबाद में मंदिर से लाउडस्पीकर उतारने और विरोध करने वालों पर जबरदस्त लाठीचार्ज करने का मामला उठाया।
बसपा के सदस्यों ने आरोप लगाया मुरादाबाद के अकबरपुर चेदरी थाना कांठ में अनुसूचित जाति की बस्ती में स्थित शिवमंदिर से प्रशासन ने बलपूर्वक लाउडस्पीकर उतारकर लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ किया। महिलाओं को भी गिरफ्तार किया गया।
नेता सदन अहमद हसन ने कहा कि कुछ लोगों ने लाउडस्पीकर लगाकर नई परंपरा डालने की कोशिश की। बसपा सदस्यों ने कहा कि प्रशासन ने सरकार को गलत सूचना दी है। मंदिर पर बहुत पहले से लाउडस्पीकर लगा है।
मामले में सभापति गणेश शंकर पांडेय ने मामले की डीआईजी स्तर के अधिकारी से जांच कराने का निर्देश देकर मामला खत्म किया। मुरादाबाद में बसपा के जिलाध्यक्ष रणविजय सिंह ने बताया कि अगर प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की तो बसपा प्रदेश भर में आंदोलन छेड़ेगी।