यूपी पुलिस ने बेगुनाह को बनाया हिस्ट्रीशीटर
वाराणसी के लल्लापुरा में छेड़खानी का विरोध करने पर युवती को जलाने के मामले की आरंभिक जांच में पुलिस ही सवालों के घेरे में आ गई है। पुलिस युवती के जिस भाई को हिस्ट्रीशीटर बता रही है, दरअसल वह खुद पुलिस उत्पीड़न का शिकार है। पहले उसे बाइक चोरी और पुलिस पर जानलेवा हमले के आरोप में फंसाया गया लेकिन जब वह अदालत से दोषमुक्त हो गया तो उस पर गैंगस्टर और फिर गुंडा एक्ट लगा दिया गया। थाने में हिस्ट्रीशीट (59 ए) खुल गई। पुलिस के डर से युवती का भाई अपनी पत्नी और बच्चों के साथ मऊ स्थित अपने ननिहाल में रहने लगा। इतना ही नहीं, युवती ने पहले भी आरोपियों के खिलाफ छेड़खानी की शिकायत पुलिस से की थी लेकिन सुनवाई नहीं हुई। बाद में कोर्ट के आदेश पर एफआईआर तो दर्ज हुई लेकिन आरोपी पकड़े नहीं गए। अलबत्ता, आरोपियों की तहरीर पर पुलिस ने युवती के बुजुर्ग माता-पिता और दो भाइयों के खिलाफ मारपीट का मुकदमा दर्ज कर लिया।
नौ अक्तूबर 2009 को सिगरा पुलिस ने पिशाचमोचन तिराहे से मुठभेड़ के बाद युवती के भाई समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया था। तब पुलिस ने दोनों की निशानदेही पर पास के मोटरसाइकल स्टैंड से चोरी की छह बाइक के अलावा दो तमंचे बरामद करने का दावा किया था। पुलिस ने युवती के भाई पर पुलिस पार्टी पर फायरिंग का आरोप भी लगाया लेकिन अदालत में पुलिस यह साबित नहीं कर पाई कि बरामद तमंचे से फायर किया गया था। बैलेस्टिक एक्सपर्ट और आर्मरर के परीक्षण में फायरिंग साबित नहीं हुई। बरामद वाहनों को किसी अपराध से कनेक्ट नहीं किया जा सका।
पुलिस ने जिस स्टैंड से बाइक बरामद करने का दावा किया था, उस स्टैंड संचालक ने भी इसकी पुष्टि नहीं की। साक्ष्यों के परीक्षण के बाद अदालत ने युवती के भाई को दोषमुक्त कर दिया। परिवार वालों का आरोप है कि पुलिस उसे घर से उठाकर ले गई थी और फर्जी मामले में फंसा दिया। करीब छह महीने जेल में रहने के बाद जब उसकी रिहाई हुई तो अगले ही दिन पुलिस ने गैंगस्टर लगा कर उसे गिरफ्तार कर लिया। गैंगस्टर में जमानत हुई तो गुंडा एक्ट लगा दिया गया। उस पर 2009 से अब तक पुलिस ने कुल नौ मुकदमे दर्ज किए हैं।
आरोपियों पर पुलिस की मेहरबानी
बाबूदान, गप्पू और पप्पू पर छेड़खानी का विरोध करने पर युवती को जलाने का आरोप है। दो सितंबर 2013 को गप्पू ने युवती के पिता और दो भाइयों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। वहीं आरोपियों की शह पर इससे पहले 22 मई 2013 को भी लल्लापुर क्षेत्र के एक अन्य व्यक्ति ने युवती और उसके माता-पिता के खिलाफ मारपीट का मुकदमा दर्ज कराया था। पीड़ित युवती के पिता का कहना है कि तीनों आरोपी पुलिस के मुखबिर हैं। उन्हीं के दबाव में पुलिस उनका उत्पीड़न करती रही। कुछ महीनों पहले उनकी बेटी ने जब तीनों के खिलाफ छेड़खानी का आरोप लगाकर तहरीर दी तो पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया। बाद में अदालत के निर्देश पर आरोपियों में एक गप्पू के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया लेकिन वारंट के बाद भी गिरफ्तारी नहीं की गई। युवती का पिता का कहना है कि मुकदमेबाजी में तीन लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। एक बेटा मजदूरी कर खर्च चलाता है। बेटी के इलाज के लिए पैसे नहीं हैं। परिवार की यह हालत पुलिस प्रताड़ना की वजह से हुई है।
आईजी जोन का आदेश भी दरकिनार
युवती के पिता ने बताया कि उनकी बेटी ने बीते 12 दिसंबर को आईजी जोन से भी मामले की शिकायत की थी। उन्होंने एसएसपी को जांच के लिए लिखा था लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। उनका परिवार पांच साल से पुलिस प्रताड़ना से आजिज आ चुका है। पुलिस ने अगर आरोपियों के खिलाफ समय से कार्रवाई की होती तो आज उनकी बेटी की यह हालत नहीं हुई होती। एसओ सिगरा शिवानंद मिश्रा का कहना है पीड़ित और आरोपी पक्ष के बीच मुकदमे का मामला उनकी तैनाती के पूर्व का है। उनके रहते पीड़ित की ओर से कोई शिकायत नहीं की गई थी।
आईजी अमरेंद्र कुमार सेंगर ने कहा कि शिकायत के बाद एसएसपी को जांच दी गई थी। पुलिस ने इस मामले में क्या कार्रवाई की इसकी जांच कराई जा रही है। पुलिस की लापरवाही अगर सामने आई तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।