यूपीः पुलिस के इस सिपाही की करतूत उड़ा देगी आपके होश
पुलिस लाइन के शस्त्रागार से प्रतिबंधित बोर के कारतूसों को वेस्ट यूपी के बदमाशों को सप्लाई करने का मामला प्रकाश में आया है। स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) लखनऊ की टीम ने छापा मारकर इस मामले में शस्त्रागार के मोहर्रिर को रंगेहाथ गिरफ्तार किया है।
टीम ने कारतूस खरीदने वाले को भी मौके से पकड़ा है। दोनों के पास से 514 से प्रतिबंधित बोर के कारतूस बरामद हुए हैं। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि इन कारतूसों को वेस्ट यूपी के बदमाशों को चार-चार हजार रुपये में बेचा जाता था।
मोहर्रिर से कई और सनसनीखेज खुलासे होने से पुलिस महकमे में हड़कंप मचा है। एसटीएफ को लगातार सूचना मिल रही थी कि सरकारी प्रयोग के लिए आने वाले कारतूस लगातार मुरादाबाद के जरिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बड़े बदमाश गिरोहों तक पहुंच रहे हैं।
इस मामले का पर्दाफाश करने के लिए एसटीएफ के एसएसपी एस आनंद के नेतृत्व में गठित टीम कई दिनों से सहारनपुर में डेरा डाले हुए थी। शनिवार को सूचना मिली कि मुरादाबाद निवासी इदरीश पुत्र अब्दुल लतीफ सहारनपुर पुलिस लाइन में तैनात आर मोहर्रिर सुरेश सिंह मलिक से कारतूस का सौदा करने पहुंच रहा है।
एसटीएफ ने शस्त्रागार को मोहर्रिर समेत दो को रंगेहाथ पकड़ा
टीम ने गांधी पार्क और घंटाघर सहित रेलवे स्टेशन के आसपास घेराबंदी कर ली। मोहर्रिर सुरेश सिंह मलिक बैग लेकर गांधी पार्क में पहुंचा, दूसरी तरफ से इदरीश भी एक बैग लेकर उसे देने आया। इसी दौरान एसटीएफ ने दोनों को रंगेहाथ दबोच लिया।
उनके पास से 140 कारतूस .9 एमएम, 24 कारतूस 38 बोर और 350 कारतूस 3.3 के बरामद हुए। एसटीएफ के धनंजय पांडेय टीम के साथ पकड़े गए दोनों आरोपियों को सदर थाने लेकर आए। वहां उनके रिपोर्ट दर्ज कराई गई।
पुलिस ने बताया कि मोहर्रिर सुरेश सिंह मलिक अगौता जिला बुलंदशहर का रहने वाला है। वर्ष 2006 से वह सहारनपुर में तैनात है। दूसरा आरोपी इदरीश पुत्र अब्दुल लतीफ मुरादाबाद के बरबलान थाना मुगलपुर का रहने वाला है।
कई वर्षों से बेच रहा था पुलिस के कारतूस
पुलिस लाइन के शस्त्रागार से अवैध तरीके से बेचे जा रहे सरकारी कारतूस सीधे वेस्ट यूपी के बड़े बदमाश गिरोहों तक पहुंच रहे थे। डिमांड होते ही फायरिंग रेंज में खोखे जमाकर हेड मोहर्रिर कारतूस की बड़ी खेप बाहर निकाल लेता था। मुरादाबाद में तैनाती के समय मोहर्रिर एक दलाल के संपर्क में आया था। दलाल बदमाशों को प्रतिबंधित कारतूस बेचता था।
दिल्ली का एक बदमाश मोहर्रिर को कारतूस के खोखे मुहैया कराता था। इसके बाद सरकारी खजाने से निकल कर कारतूस औसतन चार हजार रुपये में बदमाशों तक पहुंचता था। यह गोरख धंधा कई वर्षों से चल रहा था और पुलिस महकमे में किसी को खबर तक नहीं थी।
पुलिस लाइन के शस्त्रागार में तैनात आर मोहर्रिर सुरेश सिंह मलिक वर्ष 2006 से पहले मुरादाबाद में तैनात था।
वहां इसकी मुलाकात बरबलान निवासी इदरीश से हुई। इदरीश का वेस्ट यूपी के बड़े गिरोहों से सीधा संपर्क है। गैंग के गुर्गे इदरीश से ही कारतूस खरीदते थे। पूछताछ में पाया गया कि मुरादाबाद तैनाती के वक्त भी मोहर्रिर वहां के शस्त्रागार से कारतूस निकालकर बदमाशों को बेचता था। सहारनपुर स्थानांतरण होने के बाद भी यह काम बदस्तूर जारी रहा।
ऑन डिमांड कारतूस शस्त्रागार से निकालकर एकत्र करता था। कारतूस निकालने के बाद उतने ही खोखे वह फायरिंग रेंज में जमा कर सरकारी कागजात को दुरुस्त रखता था। हालांकि एसटीएफ को हाल में इसकी भनक लग गई थी। जानकार सूत्रों के अनुसार एसटीएफ के हत्थे चढ़े एक बदमाश ने कारतूस खरीदने का क्लू दिया था।
150 से चार हजार तक बिकता था कारतूस
शस्त्रागार से कारतूस चोरी कर मोहर्रिर सुरेश सिंह मलिक मुरादाबाद निवासी इदरीश को बेचता था। इदरीश प्रतिबंधित कारतूसों की कीमत 150 रुपये से 350 रुपये तक देता था। इसके बाद वह बड़े गिरोहों को तीन से चार हजार रुपये में कारतूस बेचता था। पूछताछ में उसने बताया कि हाल ही में उसने 3.3 और 38 बोर के कारतूस 4050 रुपये प्रति कारतूस बेचा था। यह कारतूस मुजफ्फरनगर, शामली और मुरादाबाद के बदमाशों को सप्लाई किया जा रहा था।
दिल्ली से आते थे कारतूस के खोखे
पूछताछ में उसने बताया कि दिल्ली निवासी अफसर भी इनके संपर्क में था। अफसर कारतूस के खोखे मोहर्रिर को मुहैया कराता था। जिन कारतूस की जरूरत बदमाशों को होती थी। उनके खोखे वह सहारनपुर में मोहर्रिर के पास भेजता था। इसके बाद यहां शस्त्रागार में खाली खोखे रखवाकर वह कारतूस बदमाशों तक पहुंचाता था।