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नहीं सुधरी सुप्रीम कोर्ट में शर्मसार हो चुकी यूपी पुलिस

Thu, 16 May 2013 01:50 AM IST
पीयूष पांडेय
पीयूष पांडेय Updated Thu, 16 May 2013 01:50 AM IST
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up police beat 3 year old girl in court premises

आम जनता पर पुलिस के बर्बर रवैये को लेकर चाहे सुप्रीम कोर्ट नाराज हो या फिर कोई और संवैधानिक संस्था। पुलिस के बर्ताव में बदलाव लाना टेढ़ी खीर है।

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शायद तभी अलीगढ़ में प्रदर्शनकारी महिला के खिलाफ ज्यादती पर सर्वोच्च अदालत में शर्मसार हो चुकी उत्तर प्रदेश पुलिस के रवैये में सुधार नहीं आया और फिर से एक नन्ही सी जान पर कहर बरपाया।
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पुलिसकर्मियों ने तीन साल की बच्ची की अदालत परिसर में केवल इस पिटाई की क्योंकि वह तारीख पर आए अपने पिता और विचाराधीन कैदी से दूर नहीं जा रही थी।

अतिरिक्त जिला जज बुलंदशहर के न्यायालय परिसर में पुलिस के इस रूप को तमाम लोगों ने देखा लेकिन इसकी किसी ने शिकायत नहीं की।

हालांकि मीडिया में आई खबर पर संज्ञान लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस मसले पर बुलंदशहर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी किया है।

याद रहे कि सर्वोच्च अदालत पुलिस बर्बरता के मुद्दे पर दिल्ली, पंजाब, उत्तर प्रदेश और बिहार को कड़ी फटकार लगा चुकी है।

साथ ही पुलिस सुधार के प्रकाश सिंह मामले में दिए गए अपने फैसले को नया रूप देने के लिए सुनवाई कर रही है।

शीर्षस्थ अदालत ने ऐसे मामलों को संज्ञान में लाने की जिम्मेदारी अदालत के मित्र (एमाइकस क्यूरे) को सौंपी हैं। पश्चिमी यूपी के बुलंदशहर में फिर दोहराई गई पुलिस बर्बरता को एमाइकस क्यूरे अदालत के संज्ञान में ला सकते हैं।
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सर्वोच्च अदालत की अवकाश कालीन पीठ की ओर से इस पर सुनवाई हो सकती है। पुलिस ने 3 मई को एडीजे के अदालत परिसर में विचाराधीन कैदी की बेटी को महज इस वजह से पीटा क्योंकि वह पिता के साथ थोड़ी देर और रहने की जिद कर रही थी।


आयोग ने कहा है कि यदि समाचार सही है तो यह बच्ची के मानवाधिकार के उल्लंघन का गंभीर मामला है। आयोग ने एसएसपी से चार सप्ताह में रिपोर्ट तलब करते हुए पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्यवाही के बारे में भी पूछा है।

गौरतलब है कि बुलंदशहर जेल से एडीजे कोर्ट में तारीख पर लाए गए विचाराधीन की गोद से पुलिस वालों ने बच्ची को पहले जबरन छीना और उसे दूर ले गए। इस दौरान पुलिस ने बच्ची को पीटा और फिर उसके पिता को जेल ले गए।

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