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'अनजानी लापरवाही’ में यूपी ने गंवा दिए करोड़ों
मुरादाबाद/पुनीत शर्मा
Updated Sat, 03 Nov 2012 11:38 PM IST
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हैरत है...जो अफसर रोज विकास के लिए फंड जुटाते हैं...जनता के हित को प्लान बनाते हैं। हर फाइल और फरमान पर जिनकी बारीक नजर रहती है उनसे इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई?
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उनके खाते में एक ऐसा फंड पूरे साल पड़ा रहा जिससे अगर चाहते तो जिलों की तस्वीर बदल सकती थी लेकिन इसे खर्च नहीं किया जा सका क्योंकि सरकार के इस नवाचार फंड के बारे में कोई जानता ही नहीं था। हल्ला तब मचा है जब सरकार ने पूछताछ शुरू करते हुए दूसरी किश्त पर रोक लगाई। अकेले मुरादाबाद मंडल में ही ढाई करोड़ रुपये का फंड दिया गया था।
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नवाचार योजना के तहत एक ऐसा जादुई फंड दिया जाता है जिससे अगर जिलाधिकारी चाहते तो सरकारी संपत्ति को बहुपयोगी बना सकते थे। किसी स्थान को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता था। किसी पुल की मरम्मत हो सकती थी। इस योजना के तहत सरकार ने प्रदेश के 28 जिलों में करोड़ों का फंड दिया था।
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मुरादाबाद मंडल में ढाई करोड़ और जिले को 46 लाख रुपये दिए गए। एक नहीं किसी भी जिलाधिकारी ने इस फंड का पूरे साल इस्तेमाल नहीं किया। हकीकत में जानकारी तब हुई जब सरकार ने इस फंड के उपयोग के बारे में पूछताछ शुरू की।
महीनों पहले सभी डीएम को भेजी गई चिट्ठी करीब माह भर पहले निकली तो इस फंड के बारे में अफसरों को जानकारी हुई। तब तक प्रदेश की जनता दूसरी किश्त गंवा चुकी है। सरकार ने यह कहते हुए दूसरी किश्त पर रोक लगा दी है कि पहली किश्त पहले उपयोग की जाए।
यही नहीं जिलाधिकारियों को नवाचार के बारे में पाठ पढ़ाने के लिए पूरी डिटेल भी भेजी गई है ताकि वह जानकर इस फंड का इस्तेमाल कर सकें। अपर भूमि व्यवस्था आयुक्त एवं सचिव डॉ. भास्कर उपाध्याय ने प्रदेश के कमिश्नरों को पत्र भेजकर सख्त नाराजगी जताई है।
इन जिलों में पड़ा रह गया फंड
मुरादाबाद
बिजनौर
अमरोहा
भीमनगर
रामपुर
मेरठ
हापुड़
गौतमबुद्धनगर
बागपत
मैनपुरी
फिरोजाबाद
इटावा
कौशांबी
प्रतापगढ़
ललितपुर
बांदा
संत रविदास नगर(भदोही)
आजमगढ़
गोरखपुर
महाराजगंज
देवरिया
बस्ती
लखनऊ
उन्नाव
रायबरेली
श्रावस्ती
बाराबंकी