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'लैपटॉप बांटने को पैसा है पर शिक्षकों को देने के लिए नहीं'

Tue, 30 Jul 2013 01:24 AM IST
नई दिल्ली/पीयूष पांडेय
नई दिल्ली/पीयूष पांडेय Updated Tue, 30 Jul 2013 01:24 AM IST
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up government have money for laptops not to give teachers

उत्तर प्रदेश सरकार के पास लैपटॉप बांटने के लिए पैसा है, लेकिन राज्य के डिग्री कॉलेज शिक्षकों का बकाया भुगतान करने के लिए पैसा नहीं है।

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यह तल्ख टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को प्रदेश सरकार की उस याचिका को खारिज करते हुए की, जो छठा वेतन आयोग लागू किए जाने के बाद बकाया भुगतान के विवाद पर दायर की गई थी।
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केंद्र और राज्य सरकार के बीच चल रहा यह विवाद इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश के बाद सर्वोच्च अदालत पहुंचा था। सर्वोच्च अदालत ने यूपी सरकार की याचिका पर 22 मई को केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है।
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अखिलेश ने नहीं चुकाए लैपटॉप के पूरे पैसे

दरअसल कुल बकाया का 80 प्रतिशत राज्य को केंद्र की ओर से भुगतान करने के मसले पर अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सरकार ने शीर्षस्थ अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

यूपी सरकार का कहना था कि आयोग की सिफारिशें लागू किए जाने के बाद उसने डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों को वेतनमान के बकाया का 262 करोड़ रुपये दिया है।

यह राशि वह 20 प्रतिशत है जो राज्य की ओर से भुगतान किया जाना था। शेष 80 प्रतिशत बकाया विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी केंद्र की ओर से भुगतान किया जाना है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने राज्य की याचिका पर अब तक कोई जवाब नहीं दिया।

वहीं हाई कोर्ट में केंद्र ने कहा था कि पहले राज्य की ओर से बकाया का पूर्ण भुगतान किया जाए। इसके बाद केंद्र की ओर से राज्य को भुगतान कर दिया जाएगा। लेकिन प्रदेश सरकार इस पर राजी नहीं थी जिसके चलते शीर्षस्थ अदालत का दरवाजा खटखटाया गया।

जस्टिस एलएल गोखले की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष प्रदेश सरकार ने कहा कि राज्य में कई विकास कार्य लंबित हैं। ऐसी स्थिति में केंद्र के बकाया 80 प्रतिशत भुगतान (करीब 856 करोड़ रुपये) का भार झेलना प्रदेश सरकार के बस में नहीं है।

इस पर पीठ ने कहा कि राज्य सरकार के पास लैपटॉप बांटने के लिए पैसे हैं। और सब कार्य के लिए पैसे हैं। लेकिन शिक्षकों का बकाया भुगतान करने के लिए पैसे नहीं है।

राज्य सरकार की याचिका खारिज
इस नाराजगी के साथ अदालत ने राज्य सरकार की याचिका खारिज कर दी। जबकि केंद्र का जवाब अब तक इस मसले पर अदालत को नहीं दिया गया था।

गौरतलब है कि राज्य सरकार ने एक दिसंबर, 2008 से 31 मार्च, 2010 तक का बकाया शिक्षकों को दिया है। जबकि एक जनवरी, 06 से 30 नवंबर, 08 तक का बकाया शेष है जिसके भुगतान के लिए केंद्र से राज्य सरकार कोष मांग रही है।


वहीं भुगतान के आदेश का अनुपालन न करने पर हाई कोर्ट ने इस मसले पर दायर अवमानना याचिकाओं पर राज्य सरकार को नोटिस किया है।

बकाया मामले का घटनाक्रम:-
31 दिसंबर, 2008 में छठा वेतन आयोग 2006 से लागू करने के संबंध में केंद्र की ओर से जारी की गई अधिसूचना में कहा गया था कि बकाया का 80 प्रतिशत भुगतान विश्वविद्यालय अनुदान करेगा। लेकिन सभी राज्य की ओर से सभी नया वेतनमान लागू करने सहित आयोग की सभी सिफारिशें लागू करनी होंगी।

यूपी सरकार ने 2009 में अधिसूचना जारी कर 65 वर्ष तक कार्यकाल किए जाने की सिफारिश को छोड़कर अन्य सभी को लागू कर दिया। लेकिन एक सिफारिश न मानने की वजह से केंद्र ने बकाया भुगतान में अपना हिस्सा देने से इंकार कर दिया।

हालांकि 14 अगस्त, 2012 को केंद्र ने 65 वर्ष तक कार्यकाल किए जाने की सिफारिश को वापस ले लिया। इसके बाद भी बकाया न मिलने पर शिक्षक ह्दयनाथ त्रिपाठी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। जहां के आदेश से असंतुष्ट राज्य सरकार सर्वोच्च अदालत पहुंची है।

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