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एनआरएचएम घोटाले में यूपी सरकार से जवाब तलब
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 21 Jan 2013 08:47 PM IST
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एनआरएचएम घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से आरोपियों के खिलाफ अभियोग चलाने की मंजूरी देने में देरी किए जाने के मसले पर जवाब तलब किया है। शीर्षस्थ अदालत ने यह आदेश सीबीआई की उस दलील पर जारी किया है, जिसमें कहा गया कि राज्य सरकार की ओर से अनुमति देने में देरी की जा रही है।
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सर्वोच्च अदालत ने घोटाला मामले के ट्रायल को जारी रखने का निर्देश जारी करते हुए सीबीआई जांच में देरी की शिकायत पर प्रतिपक्षों से भी जवाब तलब किया है। अदालत सीबीआई की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही है। हाईकोर्ट ने आईएएस अधिकारी प्रदीप शुक्ला की दायर याचिका को जनहित याचिका के तौर पर स्वीकार करते हुए एजेंसी से गिरफ्तारी के तौर तरीकों पर स्पष्टीकरण मांगा गया था। साथ ही घोटाले की जांच की निगरानी करने को कहा था। इस आदेश पर शीर्षस्थ अदालत ने रोक लगा दी थी।
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जस्टिस डीके जैन की अध्यक्षता वाली पीठ ने राज्य सरकार की ओर से पेश हुए अपर महाधिवक्ता गौरव भाटिया से कहा कि आरोपियों के खिलाफ अभियोग चलाने की मंजूरी कितने मामलों में दी गई है और कितने मामलों में लंबित है। इस संबंध में राज्य सरकार अदालत में जवाब के तौर पर हलफनामा दाखिल करे। याद रहे कि पिछली सुनवाई में सीबीआई ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया था कि अभियोग चलाने की मंजूरी में लगातार देरी की जा रही है। इस पर पीठ ने राज्य सरकार के अधिवक्ता को तलब किया था।
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सर्वोच्च अदालत ने एजेंसी की याचिका पर हाईकोर्ट के आदेश पर 26 सितंबर को रोक लगा दी थी। सीबीआई ने कहा कि शुक्ला पर मुकदमा चलाने की अनुमति देने का काम कार्मिक मंत्रालय और केंद्रीय सतर्कता विभाग (सीवीसी) का है। मगर हाईकोर्ट ने इसके लिए भी सीबीआई को दोषी ठहराया। हाईकोर्ट जांच पर निगरानी रख रहा है जबकि इसका आधार नहीं बनता।
सीबीआई की अब तक की कार्रवाई
एनआरएचएम घोटाले में अभी तक 18 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। हाईकोर्ट ने जनहित याचिका पर 15 नवंबर, 2011 को घोटाले की जांच का आदेश दिया था। इससे संबंधित चार मामलों में आरोप-पत्र भी दाखिल किया जा चुका है। इनमें 20 अभियुक्त और दो फर्मों के खिलाफ मुकदमा चलाने का अनुरोध विशेष अदालत से किया गया गया है। उत्तर प्रदेश के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा, पूर्व विधायक राम प्रसाद जायसवाल तथा अन्य के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया जा चुका है। सीबीआई अभी तक 1700 लोगों के बयान दर्ज कर चुकी है। लगभग 800 दस्तावेज जब्त किए जा चुके हैं। पचास हजार पन्नों के यह दस्तावेज मुकदमे के लिए अहम हैं। एजेंसी के मुताबिक घोटाले के 1.60 करोड़ रुपये बरामद किए जा चुके हैं। बैंक खातों में जमा 14.80 करोड़ रुपये की रकम जब्त की जा चुकी है। 40 करोड़ के फर्जी भुगतान का पता लगाया जा चुका है।