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यमुना को बांधने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे यूपी के किसान
नई दिल्ली/पीयूष पांडेय
Updated Sun, 17 Feb 2013 07:41 PM IST
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यमुनोत्री से निकलकर इलाहाबाद में गंगा से मिलकर संगम का सृजन करने वाली यमुना के पानी को हरियाणा में रोके जाने के खिलाफ उत्तर प्रदेश के किसानों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उनके मुताबिक प्राचीन काल में कृष्ण की अठखेलियों को सुबह-शाम अपने तट पर देखने वाली यमुना अब भगवान की नगरी मथुरा तक पहुंचने को तरसती है क्योंकि उत्तर प्रदेश तक पहुंचने से पहले ही कालिंदी के बहाव को बांध दिया जाता है।
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इस कारगुजारी के खिलाफ दायर याचिका में मथुरा निवासी पवन चतुर्वेदी समेत कई किसानों ने सर्वोच्च अदालत से जल बंटवारा ट्रिब्युनल गठित करने की सिफारिश केंद्र से करने के लिए राज्य सरकार को आदेश जारी करने का आग्रह किया गया है ताकि हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश को बराबर पानी मिल सके।
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अधिवक्ता एमपी शोरावाला की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि हरियाणा अक्सर यमुना के पानी को अपने राज्य में रोक लेता है। इसके चलते नदी में पानी का स्तर घट जाता है और यूपी के किसानों को बड़ी मुसीबत का सामना करना पड़ता है।
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दिल्ली में यमुना में इतना प्रदूषण छोड़ा जाता है कि उसके आगे नदी का कम और नालियों का पानी ज्यादा पहुंचता है। इसके पीछे बहाव को दिल्ली से पहले बांधा जाना एक मुख्य वजह है। अदालत से इस मामले में हस्तक्षेप की गुजारिश करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को तत्काल इसके लिए कदम उठाने का निर्देश जारी करने की मांग की गई है।
कृष्ण की नगरी भी सूखी
कृष्ण के जन्म से लेकर भगवान की अठखेलियों तक से यमुना का नाता जगजाहिर है। मगर अब हालत यह हैं कि यमुना मथुरा के घाटों में भी नहीं पहुंच पाती जबकि उसका सबसे पुराना रिश्ता इस क्षेत्र से है।
1994 में मेमोरैंडम पर हुए थे हस्ताक्षर
किसानों की याचिका में कहा गया है कि 1994 में राज्यों के बीच एक मेमोरैंडम हस्ताक्षरित हुआ था, जिसमें यमुना बोर्ड का गठन कर सभी राज्यों में पानी की आपूर्ति का निर्धारण किया गया था। मगर बोर्ड हरियाणा की कारगुजारियों के आगे असफल साबित हुआ। इसके चलते दिल्ली की सीमा से सटे उत्तर प्रदेश के तमाम गांवों से लेकर इलाहाबाद तक के किसानों को मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है।