फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   up district administration unaware child laborers

बाल मजदूरों की दुर्दशा से बेखबर यूपी जिला प्रशासन

Sun, 20 Jan 2013 08:28 PM IST
नई दिल्ली/प्रियंवदा सहाय
नई दिल्ली/प्रियंवदा सहाय Updated Sun, 20 Jan 2013 08:28 PM IST
विज्ञापन
up district administration unaware child laborers

उत्तर प्रदेश में बाल श्रमिकों के प्रति प्रशासन की संवेदनहीनता की कलई राष्ट्रीय बाल अधिकार एवं संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने खोल दी है। एनसीपीसीआर के मुताबिक प्रदेश के कई जिलों में बाल मजदूरों के उत्थान की योजनाओं को आज तक लागू नहीं किया गया है। कई जिला प्रशासन को अपने यहां रहने वाले बाल मजदूरों की

विज्ञापन

दुर्दशा का पता तक नहीं है।

एनसीपीसीआर के सदस्य डॉ. योगेश दूबे की अगुवाई में कई जिलों का दौरा कर चुकी आयोग की टीम ने वाराणसी, भदोही, सोनभद्र, रविदासनगर समेत कई जिलों में प्रशासन की ओर से बाल श्रमिकों के उत्थान के लिए उठाए गए कदमों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विज्ञापन


भदोही में बाल मजदूरी रोकने के लिए जिला प्रशासन ने आज तक कड़े कदम नहीं उठाए हैं। पिछले आठ माह में जिले से एक भी बाल मजदूर को मुक्त नहीं कराया जा सका है। वहीं, कई दूसरे जिलों में बाल मजदूरों की शिक्षा, रहन-सहन और उनके जीवन के उत्थान के लिए प्रशासन का रवैया गैर जिम्मेदाराना है।
विज्ञापन
विज्ञापन


रिपोर्ट में सामाजिक कल्याण विभाग की असफलता का उल्लेख भी किया गया है। उसके पास बाल कल्याण से जुड़े कई जरूरी आंकड़े नहीं पाए गए हैं। ज्यादातर इलाकों में बाल मजदूरी छोड़ चुके बच्चों के लिए कोई विद्यालय की व्यवस्था नहीं है।

आयोग ने कहा है कि अब से भी जिलों में मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी को डॉक्टरों की एक टीम तैयार करनी चाहिए। यह टीम जरूरतमंद और शारीरिक व मानसिक रूप से अक्षम बच्चों की पहचान कर उन्हें सहायता पहुंचाने का काम करे।


आयोग का कहना है कि यहां बाल मजदूरों और विकलांग बच्चों की स्थिति का जायजा लेने के लिए एक सर्वे होना चाहिए। बच्चों की खास जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उचित व्यवस्था का होना जरूरी है। शिक्षा विभाग के पास पढ़ाई के बीच में स्कूल छोड़ने वाले बच्चों का सही आंकड़ा भी मौजूद नहीं है। इसलिए ऐसे बच्चों के ऊपर भी जल्द एक सर्वे होना चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed