अखिलेश पर गुर्राए मोदी के शेर, सपा ने बताया स्वागत
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव इन दिनों मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। मुजफ्फरनगर दंगों की आंच अभी ठंडी भी नहीं पड़ी थी कि शरणार्थी शिविरों में रहने वाले पीड़ितों की ठंड से मौत के मामले में तूल पकड़ लिया।
यह मामला शायद दब जाता, लेकिन इस बीच अखिलेश और समाजवादी पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव के पुश्तैनी घर सैफई में सालाना जलसे में हुए खर्च ने एक बार फिर उन्हें आलोचना के घेरे में ला दिया।
इस बीच बात करते हैं अखिलेश के उन शेरों की, जो गुजरात से उत्तर प्रदेश पहुंचे हैं। खबर है कि सूबे के मुख्यमंत्री कुछ दिन पहले इन शेरों से मुलाकात करने गए थे। आइए जानें तब क्या हुआ?
'शेरों ने गुर्राकर किया अखिलेश का स्वागत'
नए साल के पहले रोज मुख्यमंत्री अखिलेश यादव शेरों से मिलने पहुंचे और जैसे ही पिंजड़े के करीब गया, शेर गुर्रा उठा। कारागार मंत्री, समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता और अखिलेश के करीबी सहयोगी राजेंद्र चौधरी इस बात से काफी खुश ह़ुए।
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक उन्होंने इसके तुरंत बाद एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की, जिसमें लिखा, "जब अखिलेश शेरों के पास गए, तो उन्होंने उन्हें को गौर से देखा और जोर से दहाड़ लगाकर मुख्यमंत्रीजी का अभिनंदन किया।"
जाहिर है, अखिलेश को इन दिनों ऐसी जगह की जरूरत कहीं ज्यादा महसूस हो रही है, जहां उनका स्वागत किया जाए। हालांकि, शायद राजेंद्र चौधरी ने शेरों की बात नहीं समझी।
'शेर गुजरात से आए, इसलिए गुर्राए'
कम से कम विपक्षी दल का तो कुछ ऐसा ही मानना है। मुख्यमंत्री पर लगातार हो रहे हमलों के बीच भाजपा ने एक बार फिर उन्हें निशाने पर लिया। भाजपा प्रवक्ता विजय पाठक ने कहा कि ये शेर गुजरात से ताल्लुक रखते हैं, ऐसे में उन पर गुर्राना स्वाभाविक है।
ये दोनों शेर अखिलेश यादव को काफी प्रिय हैं, क्योंकि यह इटावा में एक और ड्रीम प्रोजेक्ट से ताल्लुक रखते हैं, जिसका नाम है लॉयन सफारी। मुख्यमंत्री 1 जनवरी को चिड़ियाघर गए और यह देखा कि उनकी सेहत कैसी है।
अखिलेश यादव ने उनकी डाइट के बारे में भी पूछताछ की। वह इन दिनों दोनों शेरों को लेकर कुछ ज्यादा सजग इसलिए हैं, क्योंकि उनहें जल्द ही इटावा शिफ्ट किया जाना है।
शेरनी से मिलने कानपुर जाएंगे सीएम
ऐसा बताया जा रहा है कि अखिलेश अब कानपुर चिड़ियाघर जाएंगे, जहां लक्ष्मी को रखा गया है। लक्ष्मी हैदराबाद से लॉयन सफारी के लिए लाई गई शेरनी है, जिसे पहले बैक्टीरियल इंफेक्शन हो गया था।
जू डायरेक्टर के थॉमस ने मुख्यमंत्री की 15 जनवरी को होने वाले टूर की पुष्टि की। हालांकि, वह उन आवारा कुत्तों को लेकर चिंतित हैं, जो आए दिन चिड़ियाघर के भीतर घुस जाते हैं।
थॉमस ने आदेश दिए हैं कि इन कुत्तों को बेहोश कर कहीं और ले जाने के आदेश दिए हैं। और अगर ये कुत्ते इसके बावजूद अखिलेश यादव के दौरे के वक्त खलल पैदा करें, तो गोली मार दी जाए। एनिमल एक्टिविस्ट इसका विरोध कर रहे हैं, लेकिन उन पर कोई असर नहीं है।
शेरों पर हो चुकी है सियासत
इन शेरों पर इसलिए काफी कुछ दांव पर लगा है, क्योंकि यह देश की दूसरी लॉयन सफारी से कहीं ज्यादा सुर्खियां बटोर रहे हैं। बहराइच रैली के दौरान भाजपा के पीएम पद के दावेदार नरेंद्र मोदी ने इन्हें अखिलेश पर हमला बोलने के लिए इस्तेमाल किया था।
मोदी ने कहा था, "मैंने उन्हें शेर दिए हैं। लेकिन मुझे लगता है कि अगर वह गाय मांगते, तो ज्यादा अच्छा रहता है, क्योंकि इससे किसानों को आजीविका का साधन मिलता।"
उन्होंने कहा था, "या फिर वह गुजरात से बिजली मांग सकते थे। वह अमूल नेटवर्क के बारे में भी मुझसे पूछ सकते थे।" अखिलेश ने पलटवार करते हुए कहा था कि उनकी सरकार ने शेरों के बदले कई जानवर गुजरात को सौंपे हैं।
अखिलेश के परिवार को नहीं जानते शेर?
इस बीच सफारी परियोजना रफ्तार पकड़ रही है। उत्तर प्रदेश के जूलॉजिकल गार्डन राज्य मंत्री एस पी यादव की अगुवाई में हाल में एक दल इंग्लैंड के लंदन जू, और लॉन्गलेट सफारी एंड एडवेंचर पार्क होकर आया, ताकि इसके लिए नए आइडिया आ सकें।
ऐसा बताया जाता है कि अखिलेश यादव के बच्चे भी अपने पसंदीदा शेरों को देखने के लिए लखनऊ जू जाते रहते हैं। सोमवार को जू आम तौर पर बंद रहता है, लेकिन उनके बच्चों के लिए इसे खास तौर से खोला गया था।
जू के अधिकारियों ने बताया कि एक और बार ऐसा हुआ था, तो उन्हें निराश लौटना पड़ा। सियासी प्रोटोकॉल न समझने वाले इन शेरों ने अपने बाड़ों से बाहर आने से मना कर दिया।