{"_id":"aaf8b422-e92b-11e2-8462-d4ae52bc57c2","slug":"up-and-bihar-will-get-more-benefit-from-food-security","type":"story","status":"publish","title_hn":"यूपी, बिहार को मिलेगा खाद्य सुरक्षा का ज्यादा फायदा","category":{"title":"India News Archives","title_hn":"इंडिया न्यूज़ आर्काइव","slug":"india-news-archives"}}
यूपी, बिहार को मिलेगा खाद्य सुरक्षा का ज्यादा फायदा
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Wed, 10 Jul 2013 12:10 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
खाद्य सुरक्षा के बिल के जरिए केंद्र सरकार भले ही पूरे देश में खाद्य सुरक्षा देने का दावा कर रही हो, लेकिन इसका सबसे अधिक फायदा यूपी, बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों को ही मिलेगा।
विज्ञापन
इस बिल के अनुसार सभी राज्यों में ग्रामीण और शहरी आबादी में लाभार्थियों का प्रतिशत तय किया गया है। इसके तहत कुछ राज्यों की 80 फीसदी तो कुछ की 50 फीसदी आबादी को ही लाभ मिल रहा है।
विज्ञापन
सियासी गेमचेंजर माने जा रहे खाद्य सुरक्षा कानून को अध्यादेश के जरिए लागू करने में जुटी केंद्र सरकार ने राज्यों के लाभार्थियों की संख्या को जिस तरीके से तय किया है, उसे लेकर राज्यों में बड़ा असंतोष पैदा हो सकता है।
विज्ञापन
योजना आयोग और खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने मिलकर खाद्य सुरक्षा अध्यादेश के तहत पीडीएस के दायरे में आने वाली राज्यों की आबादी निर्धारित की है।
राष्ट्रीय स्तर पर 75 फीसदी ग्रामीण और 50 फीसदी शहरी आबादी को योजना का लाभ देने के बावजूद राज्यों के बीच बड़ा अंतर पैदा हो गया है।
यूपी में 80 तो हरियाणा में 52 फीसदी
उत्तर प्रदेश की करीब 81 फीसदी ग्रामीण आबादी को सस्ता अनाज मिलेगा लेकिन उत्तराखंड की 62 फीसदी ग्रामीण आबादी ही इसके दायरे में है।
इसी तरह बिहार की करीब 87 फीसदी ग्रामीण आबादी को सस्ते अनाज का पात्र माना गया है लेकिन जम्मू-कश्मीर के 57 फीसदी, हरियाणा व पंजाब के 52 और हिमाचल प्रदेश के सिर्फ 48 फीसदी ग्रामीणों को सस्ता अनाज मिलेगा।
अपने यहां सबसे पहले खाद्य सुरक्षा अध्यादेश को लागू करने की तैयारी में जुटी दिल्ली के सिर्फ 44 फीसदी शहरी और 30 फीसदी ग्रामीणों को ही योजना के दायरे में रखा गया है।
राज्य करेंगे लाभार्थियों की पहचान
खाद्य मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि विभिन्न राज्यों में शहरी व ग्रामीण आबादी के बीच अंतर के चलते लाभार्थियों की संख्या में इतना ज्यादा फर्क आया है।
अब राज्यों को अपनी तय सीमा के हिसाब से लाभार्थियों की पहचान करनी है।
सोनिया गांधी करेंगी राजनीतिक लांचिंग
खाद्य सुरक्षा कानून को लागू करवाने के बाद अब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी खुद इसकी राजनीतिक लॉन्चिंग करेंगी। इसके लिए बाकायदा कांग्रेस के सभी मुख्यमंत्रियों और शीर्ष नेताओं की विशेष बैठक बुलाई गई है।
लोकसभा और विधानसभा चुनावों से पहले इसे देशभर में भुनाने के लिए कांग्रेस अपने प्रवक्ताओं की फौज भी हर राज्य में दौरे पर भेजने जा रही है। दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने अपने राज्य में खाद्य सुरक्षा कानून को 20 जुलाई से लागू करने का ऐलान भी कर दिया है।