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वार्ता फेल, कोयला श्रमिकों की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी

Wed, 07 Jan 2015 02:51 PM IST
Updated Wed, 07 Jan 2015 02:51 PM IST
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Unsuccessful negotiations with the government, coal workers strike continue.

सरकार के साथ बातचीत असफल होने के बाद लाखों कोयला श्रमिकों की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी है।

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मंगलवार से कोयला श्रमिक कोयला उद्योग के क्षेत्र में निजी निवेश के सरकार के फैसले के खिलाफ पांच दिनों की हड़ताल पर चले गए हैं।

रिपोर्टों के मुताबिक़ देश में प्रतिदिन होने वाले कुल कोयला उत्पादन (क़रीब 15 लाख टन) का 75 फीसदी हिस्सा हड़ताल की वजह से प्रभावित हुआ है।

ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक) के नेता गुरुदास दास गुप्ता ने एएफपी समाचार एजेंसी से कहा, "मैं कह सकता हूं कि यह एक देशव्यापी हड़ताल है और 1977 के बाद से ये सबसे बड़ी हड़ताल है।"

भारत दुनिया में कोयला उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी देश है।

ईंधन आपूर्ति पर असर

Unsuccessful negotiations with the government, coal workers strike continue.

भारत की व्यवसायिक ऊर्जा संबंधी जरूरत का आधा हिस्सा कोयले से मिलता है। इस हड़ताल की घोषणा पांच संगठनों की ओर से की गई है।

इसमें सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी कोल इंडिया के 37 लाख कर्मचारी शामिल हैं। कोयला उत्पादन के क्षेत्र में कोल इंडिया का एक प्रकार से एकाधिकार है।

हड़ताल के मद्देनजर इस बात का अंदेशा जताया जा रहा है कि इससे बिजली संयत्रों को होने वाली ईंधन आपूर्ति पर असर पड़ सकता है।

भाजपा के नेतृत्ववाली भारत की नई सरकार ने आर्थिक सुधारों के मद्देनज़र पिछले साल के अक्तूबर में कोयला उद्योग के दरवाज़े निजी कंपनियों के लिए खोलने का फैसला लिया था।

सरकार ने निजी कंपनियों को अपने इस्तेमाल और भविष्य में व्यवसायिक इस्तेमाल के लिए नीलामी में भाग लेने संबंधी अध्यादेश पर भी मुहर लगा दी थी।

सरकार का यह फैसला पिछले साल सुप्रीम कोर्ट की ओर से 200 कोयला खदानों के लाइसेंस रद्द करने के फैसले के बाद आया था। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला 1993 के बाद के सरकारों के दौर में हुए अरबों रुपए के घोटाले के संदर्भ में आया था।

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