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जहां महिलाओं के बिना पत्ता भी नहीं हिलता

Wed, 10 Feb 2016 07:06 PM IST
Updated Wed, 10 Feb 2016 07:06 PM IST
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Unnao make example of women's empowerment

उत्तर प्रदेश के उन्नाव में ज़िलाधिकारी आवास पर मेरी मुलाक़ात ज़िलाधिकारी सौम्या अग्रवाल से हुई। युवा आईएएस अधिकारी सौम्या की बतौर ज़िलाधिकारी ये दूसरी तैनाती है। यहीं पर ज़िले की पुलिस कप्तान नेहा पांडेय और मुख्य विकास अधिकारी संदीप कौर भी मिलती हैं।

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ज़िले की ये तीनों शीर्ष अधिकारी ज़िले के सबसे प्रमुख मुद्दे यानी ब्लॉक प्रमुख के चुनावों की चर्चा में मशगूल हैं। दरअसल, उत्तर प्रदेश का उन्नाव ज़िला आजकल एक ख़ास वजह से चर्चा में है। ज़िले में डीएम, एसपी और सीडीओ ही नहीं बल्कि 11 प्रमुख प्रशासनिक पदों पर महिलाएं तैनात हैं।
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ज़िले के पुलिस प्रमुख के अलावा परिवहन विभाग और मुख्य चिकित्सा अधिकारी जैसे पद भी महिलाओं के अधीन हैं जिन पर अक्सर पुरुष अधिकारियों की ही तैनाती होती है।
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ज़िलाधिकारी सौम्या अग्रवाल कहती हैं कि ये महज़ इत्तिफाक ही है, लेकिन इतनी बड़ी महिला टीम मिलने पर वो एक अलग आत्मविश्वास का भी अनुभव करती हैं।

पुलिस अधीक्षक नेहा पांडेय की भी बतौर पुलिस अधीक्षक ये दूसरी ही तैनाती है, वो बताती हैं कि पुरुष प्रधान संगठन होने के बावजूद इस विभाग में उन्हें पुरुषों से कोई दिक्कत नहीं हुई। चाहे वो उनके साथ काम करने वाले अधिकारी हों या फिर वरिष्ठ अधिकारी।

डीएम, एसएसपी के बाद सीडीओ के पद पर भी महिला ही

Unnao make example of women's empowerment

नेहा पांडेय कहती हैं, “कई बार दबिश देने या ऐसे किसी काम से देर रात भी दूर-दराज इलाकों में निकलना पड़ता है। लेकिन अधिकारियों के सहयोग से ये सब चीजें मुश्किल नहीं लगतीं। साथियों का सहयोग लेने के लिए ये ज़रूरी है कि मैं ख़ुद किसी मोर्चे पर आगे रहूं और मैं ऐसा ही करती हूं।”

उन्नाव ज़िले में इन अधिकारियों के अलावा मुख्य चिकित्सा अधिकारी, सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी, ज़िला प्रोबेशन अधिकारी, सहायक पंचायत राज अधिकारी, मंडी सचिव, नगर पंचायत की अधिशाषी अधिकारी के अलावा दो एसडीएम भी महिलाएं ही हैं।

यह महज़ संयोग ही है कि हाल ही में हुए ज़िला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में भी संगीता सेंगर निर्वाचित हुई हैं। महिलाओं के साथ भेदभाव या फिर काम काज में दिक़्क़तों के सवाल पर इन महिला अधिकारियों का कहना है कि उन्हें अभी तक ऐसी किसी समस्या का सामना नहीं करना पड़ा है।

गीता यादव ज़िले की चिकित्सा विभाग की प्रमुख हैं तो वहीं परिवहन जैसा अहम ज़िम्मा युवा अधिकारी माला वाजपेयी के कंधों पर हैं. माला वाजपेयी कहती हैं कि चुनौतियां सामने ज़रूर आती हैं, लेकिन उनसे निपटना वो सीख चुकी हैं।

महिला सशक्तीकरण की मिसाल बना उन्नाव

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माला वाजपेयी कहती हैं कि उन्नाव का ये उदाहरण महिला सशक्तिकरण की दिशा में बेहद अहम हैं और वो लोग दूसरों के लिए रोल मॉडल का काम करेंगी।

बात अगर उन्नाव के लोगों की की जाए तो आमतौर पर इसकी चर्चा उतनी नहीं है जितनी की उन्नाव से बाहर। लोगों को एक दो अधिकारियों के बारे में तो पता है लेकिन उनके ज़िले में 11 महत्वपूर्ण अधिकारी महिला हैं, ये जानकारी पढ़े लिखे लोगों तक ही सीमित है।

लेकिन लोगों को उम्मीदें ज़रूर हैं, शहर में फल की छोटी सी दुकान चलाने वाली राजो देवी कहती हैं कि महिला अधिकारी के पास महिलाएं अपनी समस्याएँ आसानी से सुना सकती हैं, इसलिए उन्हें अच्छे कामों की उम्मीद है। हालांकि अभी तक उन्हें ऐसा कोई ख़ास बदलाव नहीं दिखा है।

वहीं स्कूल जा रही कुछ लड़कियों का कहना था कि उन्हें पता है कि उनके ज़िले ने इस मामले में इतिहास रचा है। उन्हीं में से 11 वीं कक्षा की छात्रा ज्योति मुस्कराते हुए कहती हैं कि उसकी तमन्ना भी ऐसे ही किसी इतिहास का हिस्सा बनने की है।

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