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अनोखी मिसाल एक ही छत के नीचे ‘काशी’ और ‘काबा’

Tue, 14 Jul 2015 01:41 AM IST
पंकज चौबे/अमर उजाला, ज्ञानपुर।
पंकज चौबे/अमर उजाला, ज्ञानपुर। Updated Tue, 14 Jul 2015 01:41 AM IST
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uniqe story of communal harmony

एक ही छत के नीचे अगर आपको ‘काशी’ और ‘काबा’ की मौजूदगी का उम्दा एहसास करना हो तो एक बार कालीन नगरी आइए। जिला मुख्यालय से तकरीबन 20 किलोमीटर दूर औराई तहसील क्षेत्र के कोठरा गांव में जीटी रोड के किनारे सांप्रदायिक सौहार्द की शानदार मिसाल समृद्ध हो रही है।

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एक ही चबूतरे पर एक तरफ जहां हनुमान जी, पहलवानवीर बाबा और ब्रह्मदेव की मूर्तियां सनातनी परंपरा को संबल प्रदान कर रहीं हैं वहीं शहीद बाबा की मजार इस्लाम के धर्मवैभव को जीवंत कर रही है।
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यहां दर्शन करने आने वाला भक्त हनुमान जी के समक्ष दीपक जलाता है तो मजार के सामने अगरबत्ती भी। भक्तों की मानें तो इस पवित्र स्थान पर आने से जो सुकून मिलता है उसे बयां नहीं किया जा सकता। यही वजह है कि यहां दोनों समुदायों के सैकड़ों लोग एक साथ दर्शन और दुआ के लिए पहुंचते हैं।
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राम-रहीम को मानने वालों ने भले ही अपने निहित स्वार्थ की खातिर आपसी मनभेद की रेखा खींच डाली हो, लेकिन दो अलग-अलग संप्रदायों को एक सूत्र में पिरोने वाले इस अनोखे स्थान ने हिंदू-मुस्लिम सद्भाव की खूबसूरत तस्वीर उकेर रखी है। कोठरा में जीटी रोड के किनारे स्थित देव स्थान पर एक ही छत के नीचे हिंदू और मुस्लिम दोनों कौमों के आराध्य विराजमान हैं।

यही वजह है कि इस धार्मिक स्थल पर हर रोज दोनों समुदायों के सैकड़ों लोग दर्शन और दुआ के लिए पहुंचते हैं। इस देवालय की स्थापना और इतिहास आदि के बारे में सटीक जानकारी संभवत: किसी के पास नहीं है लेकिन, लोगों की मानें तो इस स्थान पर सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है।


इस धार्मिक स्थल की देखरेख करने वाले मेघीपुर गांव निवासी विजय दुबे कहते हैं कि मेरी तीन पीढ़ियां यहां सेवा कार्य करती आ रहीं हैं, लेकिन यह स्थान कैसे अस्तित्व में आया, यह कोई नहीं बता पाया। मैं स्वयं बजरंग बली के सामने दीपक प्रज्ज्वलित करता हूं तो शहीद बाबा की मजार पर अगरबत्ती भी जलाता हूं। यही मेरे पिता और दादा जी भी किया करते थे।

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