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अधिग्रहण के लिए 80 फीसदी भू-स्वामियों की सहमति जरूरी

Thu, 13 Dec 2012 10:45 PM IST
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 13 Dec 2012 10:45 PM IST
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Union Cabinet clears Land Acquisition Bill

निजी परियोजनाओं के लिए अधिग्रहीत की जाने वाली जमीन के लिए 80 फीसदी भू-स्वामियों की सहमति अनिवार्य होगी। वहीं, पीपीपी मोड और जनहित यानी सरकारी परियोजनाओं के लिए अधिग्रहण को दो तिहाई यानी 70 फीसदी भू स्वामियों की मंजूरी लेनी होगी। साथ ही जिस मकसद के लिए जमीन का अधिग्रहण किया गया है, उसे दस वर्षों में पूरा करना अनिवार्य होगा।

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अधिग्रहीत जमीन पर निर्धारित समय में परियोजना शुरू न होने की स्थिति में भूमि पर सरकार का कब्जा स्वत: हो जाएगा। यानी अधिग्रहीत जमीन सरकार के भूमि बैंक में जमा हो जाएगी। इन प्रावधानों वाले भूमि अधिग्रहण बिल को बृहस्पतिवार को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी। विधेयक के मसौदे में किसानों के मुआवजे और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास का प्रावधान पूर्व की तरह बरकरार रखा गया है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब सरकार का इरादा इस बिल को संसद से इसी सत्र में पास कराने का है।
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प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक में भूमि अधिग्रहण विधेयक के संशोधित मसौदे पर चर्चा के बाद इसे मंजूरी दे दी गई। इसके पूर्व उद्योगों और पीपीपी परियोजनाओं के लिए अधिग्रहीत की जाने वाली भूमि पर 80 फीसदी भू-स्वामियों की मंजूरी को अनिवार्य किए जाने के लिए यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात की थी।
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सोनिया ने सरकार से कहा था कि 80 फीसदी भू-स्वामियों की मंजूरी के बगैर अधिग्रहण नहीं होना चाहिए। मंत्रियों के समूह ने उद्योगों के दबाव में अधिग्रहण के लिए 67 फीसदी भू स्वामियों की मंजूरी को अनिवार्य किया था, जिसे लेकर किसान काफी नाराज थे।

ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश के मुताबिक पिछली दफा कैबिनेट से पास मूल विधेयक में जहां विशेष औद्योगिक क्षेत्र (एसईजेड) को खत्म कर दिया गया था। वहीं अब इसे संशोधित कर इसमें लॉजिस्टिक पार्क और नेशनल इन्वेस्टमेंट जोन (एनआईएमजेड) को शामिल कर लिया गया है।

संशोधित मसौदे में खेती वाली जमीन के अधिग्रहण से पहले परती जमीन के अधिग्रहण को प्राथमिकता दी गई है। सरकार चाहती है कि भूमि अधिग्रहण कानून के चलते औद्योगिक विकास प्रभावित न हो। भूमि अधिग्रहण विधेयक के अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं में जमीन की कीमत तय करने के  लिए गाइडलाइन, पुनर्वास, मुआवजा और पुनर्स्थापना की भी व्यवस्था की गई है।


बिल में प्रावधान है कि जिस मकसद के लिए भूमि का अधिग्रहण किया गया है। यदि उसे दस वर्षों में पूरा नहीं किया गया तो अधिग्रहीत भूमि स्वत: ही भूमि बैंक के पास चली जाएगी। हम इस बिल को इसी संसद सत्र में पास कराना चाहते हैं।--जयराम रमेश, ग्रामीण विकास मंत्री

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