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'सूचना उपलब्ध न कराने पर जुर्माना भुगतेगी यूपी सरकार'

Mon, 18 Nov 2013 12:08 AM IST
पीयूष पांडेय/अमर उजाला, दिल्ली
पीयूष पांडेय/अमर उजाला, दिल्ली Updated Mon, 18 Nov 2013 12:08 AM IST
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ultimatum to up govt for not providing information

राज्य के सरकारी महाविद्यालयों में उपस्थिति के मसले पर सूचना उपलब्ध न कराए जाने पर राज्य सूचना आयोग ने उत्तर प्रदेश सरकार को अल्टीमेटम दिया है।

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आयोग ने कहा है कि उच्च शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को आखिरी मौका दिया जा रहा है कि उनकी ओर से तीन सप्ताह में आरटीआई कार्यकर्ता की ओर से मांगी गई सभी सूचनाएं उपलब्ध कराई जाएं। अन्यथा पच्चीस हजार रुपए का जुर्माना लगाते हुए इस मामले का निपटारा किया जाएगा।
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राज्य सूचना आयुक्त खदीजातुल कुबरा ने अधिवक्ता गौरव अग्रवाल की ओर से किए गए आवेदन पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए यूपी सरकार को चेतावनी देते हुए अंतिम मौका दिया है।
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फरवरी, 2012 में आरटीआई के तहत राज्य के उच्च शिक्षा विभाग से पूछा गया था कि राजकीय महाविद्यालयों में कार्यरत नियमित व स्थायी प्रवक्ताओं, रीडर्स के हस्ताक्षर नियमानुसार पंजिका में कराया जाना अनिवार्य है या नहीं। यदि है तो इस संबंध में शासनादेश उपलब्ध कराया जाए।

लेकिन, विभाग की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया। जबकि, प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों की उपस्थिति के संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग ने जवाब में कहा था कि प्रथम श्रेणी के अधिकारियों के हस्ताक्षर करने एवं इससे मुक्त रखने संबंधी शासनादेश गत वर्षों में जारी होना नहीं पाया गया है।


आरटीआई कार्यकर्ता अग्रवाल ने जवाब न मिलने की स्थिति में जब राज्य सूचना आयोग में अपील की तो सुनवाई पर उच्च शिक्षा विभाग की ओर से कोई पेश नहीं हुआ। आयुक्त की ओर से आदेश में यह दर्ज कर लिया गया कि वादी उपस्थित हुआ। लेकिन प्रतिवादी राज्य सरकार की ओर से कोई पेश नहीं हुआ। जबकि, उसे नोटिस भेजा जा चुका था।

ऐसी स्थिति में नाराजगी जताते हुए आयुक्त ने उच्च शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को अगले वर्ष 7 फरवरी को होने वाली सुनवाई में पेश होने का आदेश दिया। साथ ही तीन सप्ताह के भीतर सूचना उपलब्ध कराए जाने का भी निर्देश दिया। यदि ऐसा नहीं किया गया तो आयोग संबंधित अधिकारी पर पच्चीस हजार का जुर्माना कर मामले का निपटारा करेगा।

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