मजारों पर न जाएं महिलाएं : उलेमा
मुंबई में हाजी अली की दरगाह में महिलाओं को प्रवेश देने को लेकर किए गए धरना प्रदर्शन पर देवबंदी उलेमा ने कहा कि जब शरीयत में महिलाओं के मजारों पर न जाने का हुक्म दिया गया है तो फिर धरना प्रदर्शन करने की कोई गुंजाइश ही नहीं बचती।
मजारों में महिलाओं के प्रवेश को लेकर वक्फ दारुल उलूम में अरबी के विद्वान मौलाना नदीमुल वाजदी ने कहा कि इस्लाम में औरतों के कब्रिस्तान में जाने की मनाही है। ऐसा करने से उनके अकीदे कमजोर होते हैं।
महिलाओं को मजारों पर जाने का हुक्म नहीं
शरीयत में महिलाओं के मजारों पर न जाने का हुक्म दिया गया है। इसी प्रकार महिलाएं जनाजा (शवयात्रा) में भी शामिल नहीं हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि मजारों में प्रवेश को लेकर धरना प्रदर्शन करना गलत है।
सभी को चाहिए कि वह शरीयत के हुक्म का पालन करें। फतवा ऑन मोबाइल के चेयरमैन मौलाना मुफ्ती अरशद फारुकी ने कहा कि शरीयत में महिलाओं के मजारों पर न जाने का हुक्म दिया गया है।
महिलाओं के मजारों पर जाने से बहुत सी बुराइयां पनपती हैं, साथ ही इससे मजारों की तौहीन होती है। मुफ्ती अरशद ने कहा कि शरीयत के हुक्म को सभी को मानना चाहिए।