स्मृति के बनाए पैनल ने कहा, किसी काम की नहीं यूजीसी
मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी द्वारा गठित एक पैनल का कहना है कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी यूजीसी असफल हो चुका है, इसे भंग कर दिया जाना चाहिए। स्मृति ईरानी ने पैनल का गठन यूजीसी के कामकाज की समीक्षा के लिए किया था।
पैनल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि यूजीसी न केवल शासानादेश को पूर्ण करने में नाकामयाब रहा है, बल्कि उभरती हुई जटिलताओं से निपटने में भी सक्षम नहीं है। यूजीसी के ही पूर्व चेयरमैन हरि गौतम के नेतृत्व में काम कर रहे पैनल ने कहा कि यूजीसी को पुनर्गठित करने का कोई मतलब नहीं है। यूजीसी एक्ट में बदलाव करना भी व्यर्थ है। इसलिए उच्च शिक्षा के लिए संसद से कानून पास कराकर नेशनल हायर एजुकेशन अथॉरिटी का गठन किया जाना चाहिए।
पैनल ने नई अथॉरिटी के लिए बिल का ड्राफ्ट भी तैयार किया है। पैनल का कहना है कि जब तक यूजीसी की वैकल्पिक बॉडी तैयार नहीं कर ली जाती, मानव संसाधन विकास मंत्री को एग्जिक्यूटिव ऑर्डर के जरिए यूजीसी में बदलाव करना चाहिए।
पैनल ने एचआरडी को दिए कई सुझाव
पैनेल ने कई सुझाव दिए हैं। जैसे पैनल का कहना है कि पीएचडी में प्रवेश के लिए देश भर के विश्वविद्यालयों के लिए नेशनल रिसर्च एप्टिट्यूड टेस्ट होना चाहिए। उल्लेखनीय है कि फिलहाल पीएचडी के लिए विश्वविद्यालय निजी स्तर पर टेस्ट लेते हैं।
पैनेल का सुझाव है कि वाइस चान्सलर बनने के निए न्यूनतम 10 साल बतौर प्रोफेसर काम करने की अर्हता भी समाप्त कर दी जानी चाहिए। पैनल का कहना है कि विश्वविद्यालयों में योग और मेडिटेशन भी पढ़ाया जाना चाहिए।
मानव संसाधन विकास मंत्रालय का कहना है कि पैनल के सूझाव महत्वपूर्ण हैं और उनका गंभीरतपूर्वक अध्ययन किया जा रहा है।