इस अग्नि परीक्षा में पास होंगे उद्धव ठाकरे?
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दिवंगत शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने जिस दिन उद्धव ठाकरे को राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित किया था उस दिन से वे लगातार अग्नि परीक्षा से गुजर रहे हैं। उनकी आलोचना हुई और पार्टी में बगावत का दौर चला।
इन तमाम झटकों और झंझावात को झेलते हुए उद्धव ने महाराष्ट्र की राजनीति में पैर टिकाए रखा। ऐसा इसलिए संभव हो पाया क्योंकि भाजपा जैसे एक बड़े दोस्त का कंधा उनके साथ था।
उद्धव ठाकरे सन 2004 में शिवसेना के कार्यकारी अध्यक्ष बने। उसके बाद शिवसेना के कद्दावर नेता नारायण राणे ने कई विधायकों के साथ पार्टी छोड़ दी।
इससे संभल भी नहीं पाए थे कि चचेरे भाई राज ठाकरे ने बगावत कर दिया और 9 मार्च 2006 में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना बनाकर उद्धव ठाकरे के वजूद को ललकारा।
राज ठाकरे ने शिवसेना के मराठी मतों में सेंधमारी कर उद्धव को जोर का झटका दिया। इस बीच उद्धव की पत्नी रश्मि ठाकरे ने पर्दे के पीछे से कमान संभाली और निष्ठावान शिवसैनिकों की फौज तैयार की।
उद्धव की क्या होगी रणनीति?
परिणामस्वरूप, सन 2007 में मुंबई महानगरपालिका चुनाव में भाजपा के सहयोग से शिवसेना को संजीवनी मिली। पर, सन 2009 के चुनाव में मनसे फैक्टर ने फिर हताश कर दिया।
सन 2014 के लोकसभा चुनाव में शिवसेना ने 18 सीट जीतकर इतिहास रचा लेकिन इस जीत का श्रेय उद्धव को नहीं नरेंद्र मोदी को मिला। इसके बाद उद्धव की उम्मीदों को पंख लग गए और वह महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनने का सपना देखने लगे।
महाराष्ट्र में सन 1995 में जब पहली बार शिवसेना-भाजपा की सरकार बनी थी। उसमें बाबरी मस्जिद का ढांचा ढहाए जाने के बाद दंगे का असर था क्योंकि तब तक शिवसेना मराठी मानुष के आगे बढ़कर हिंदुत्व के मुद्दे पर लौट आई थी।
मोदी लहर के चलते दूसरी बार महाराष्ट्र में कांग्रेस-एनसीपी के खिलाफ माहौल बना है, लेकिन इस बार बड़े दोस्त का कंधा नहीं है। नए राजनीतिक घटनाक्रम में उद्धव के सामने फिर क्षमता सिद्ध करने की चुनौती है।
भाजपा से गठबंधन के बाद शिवसेना की राजनीतिक स्थिति
सन लोकसभा सन विधानसभा
1989 1 1990 52
1989 1 1990 52
1991 4 1995 73
1996 15 1999 69
1998 6 2004 62
1999 15 2009 45
2004 12
2009 11
2014 18
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