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यूपीए की करीबी अमेरिकी राजदूत का इस्तीफा
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
Updated Tue, 01 Apr 2014 09:12 AM IST
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देश में चुनावी मौसम के बीच अमेरिका की राजदूत नैंसी पावेल ने अचानक सोमवार रात अपने पद से इस्तीफा दे दिया। पावेल को यूपीए सरकार की करीबी माना जाता रहा है और पिछले कुछ दिनों से चर्चा थी कि अमेरिका उन्हें हटा सकता है।
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इस्तीफे को भाजपा के पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी से जोड़कर भी देखा जा रहा है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक पावेल अमेरिका के मोदी से संबंध सुधारने की प्रक्रिया में बाधा बन रही थीं। हाल ही में उन्होंने मोदी से मुलाकात में भी काफी देर की थी। पिछले एक हफ्ते से चर्चा थी कि अमेरिका पावेल की जगह पर नया राजदूत नियुक्त कर सकता है, जो नई सरकार के साथ बेहतर संबंध स्थापित करने में मददगार हो।
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अमेरिकी दूतावास की वेबसाइट के मुताबिक, ‘भारत में अमेरिकी राजदूत नैंसी जे पावेल ने यूएस मिशन टाउन हॉल में हुई बैठक में अपना इस्तीफा राष्ट्रपति बराक ओबामा को सौंप दिया है। मई के अंत तक रिटायर होकर वह डेलावेर स्थित अपने घर लौट जाएंगी।’ 67 वर्षीय अधिकारी ने ऐसे समय में घर लौटने का फैसला लिया है, जब देश लोकसभा चुनावों की तैयारी में जुटा हुआ है और अमेरिका भी इस परिणाम पर खासतौर से नजर बनाए हुए है।
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माना जा रहा है कि मोदी को देश के प्रधानमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे देखते हुए अमेरिका काफी समय से उनके साथ संबंधों को सुधारने में जुटा हुआ था। इसी क्रम में पावेल ने गत 13 फरवरी को गुजरात दंगों को लेकर 9 साल के बहिष्कार को खत्म करते हुए मोदी से मुलाकात की थी। इससे पहले धार्मिक स्वतंत्रता के घरेलू कानूनों के उल्लंघन का हवाला देते हुए अमेरिका ने 2005 में मोदी को वीजा नहीं दिया था। ईयू और ब्रिटेन ने भी हाल ही मोदी का बहिष्कार खत्म कर दिया था।
37 साल का रहा कैरियर
अपने 37 साल के कार्यकाल के दौरान नैंसी पावेल युगांडा, घाना, पाकिस्तान, नेपाल और भारत के अलावा कनाडा, टोगो, बांग्लादेश और वाशिंगटन में रहीं। भारत में उन्हें 19 अप्रैल, 2012 को अमेरिकी राजदूत नियुक्त किया गया था। सामान्य तौर पर एक अमेरिकी राजदूत का कार्यकाल दो साल का होता है।
पीएम बनने पर अमेरिका मोदी को देगा राजनयिक रियायतें
वाशिंगटन। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के वीजा पर पूरे नौ साल तक प्रतिबंध लगाने के बाद अब अमेरिका उन्हें राजनयिक छूट देने के बारे में सोचने लगा है। एक संसदीय रिपोर्ट में कहा गया है कि मोदी भारत के प्रधानमंत्री बने तो वीजा प्रतिबंध अपने आप हट जाएगा और उन्हें राजनयिक रियायतें मिलने लगेंगी।
ओबामा प्रशासन ने मतभेद को नकारा
भारत में अमेरिकी राजदूत नैंसी पॉवेल के अचानक इस्तीफे के बाद ओबामा प्रशासन ने उनसे किसी प्रकार के मतभेद होने की खबरों का खंडन किया है। अमेरिकी विदेश विभाग की प्रवक्ता मेरी हार्फ ने कहा, ‘इस बात में कोई सच्चाई नहीं है। वह 37 साल की सेवा के बाद रिटायर हो रही हैं।’