झांसी में रेप से दुखी महिला प्रधान ने किया आत्मदाह
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झांसी में गुरसरांय ब्लाक क्षेत्र की एक महिला ग्राम प्रधान द्वारा खुदकुशी करने के मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पति के साथी द्वारा किए गए बलात्कार के बाद पति द्वारा कोई कदम नहीं उठाने से क्षुब्ध होकर उन्होंने आत्मघाती कदम उठाया था।
गौरतलब है कि महिला ग्राम प्रधान ने बृहस्पतिवार को अपने ही घर में आत्मदाह कर लिया था। हालांकि तब परिजन आत्महत्या को लेकर कोई ठोस कारण नहीं बता सके थे। शुक्रवार को मृतका के भाई के यहां पहुंचने पर उक्त बातों का खुलासा हुआ। बताया गया कि दो दिन पूर्व 35 वर्षीया महिला ग्राम प्रधान के साथ उसके पति के साथी गुड्डू सिंह ने बलात्कार किया था। उस समय पीड़ित घर में अकेली थी। उसने इसकी जानकारी अपने पति को दी लेकिन तब पति ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। पति का साथ नहीं मिलने पर उन्होंने अपनी पीड़ा बताने के लिए बांदा जनपद स्थित अपने मायके में फोन किया। भाई के घर पर नहीं होने के कारण भाभी ने मोबाइल रिसीव किया। उन्होंने भाभी को आपबीती सुनाई और पति का साथ न मिलने का दुख भी साझा किया।
भाई के फोन पर ऑटो कॉल रिकार्डर सिस्टम होने के कारण उनकी बात रिकॉर्ड हो गई। जैसे ही भाई घर आया तो भाभी ने उसे घटनाक्रम से अवगत कराया। भाई ने उससे बात करने के लिए फोन किया तो प्रधान के पति ने उसकी बात नहीं कराई। बलात्कार से सदमे में आई महिला प्रधान ने बृहस्पतिवार को आग लगा कर आत्महत्या कर ली।
घटना की जानकारी होने पर उसके मायके पक्ष के लोग गांव आए और ग्रामीणों के समक्ष मोबाइल में दर्ज कॉल रिकार्डिंग सुनाई और बलात्कार के आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने का दबाव बनाया। इस पर प्रधान पति और मायके पक्ष के बीच बहस भी हुई। हालांकि भारी दबाव में पति ने थाना लहचूरा में आरोपी गुड्डू सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया है। देर शाम तक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई थी।
फैसले में देरी से तंग शिक्षक ने किया आत्मदाह
गोरखपुर में भूमि विवाद के फैसले में देरी से तंग आकर बड़हलगंज के ओझौली गांव के एक शिक्षक ने शुक्रवार सुबह आत्मदाह कर लिया। शिक्षक के घरवालों और रिश्तेदारों के मुताबिक ट्रस्ट की जमीन के स्वामित्व को लेकर 29 साल से एसडीएम कोर्ट में मामला लंबित था। कई बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने के बाद भी कोई नतीजा नहीं निकलने पर शिक्षक ने तीन दिसंबर को पुलिस और प्रशासनिक अफसरों को रजिस्टर्ड डाक से पत्र भेजकर आत्मदाह की चेतावनी भी दी थी। मामले में प्रशासन का कहना है कि जमीन के बंटवारे के मामले में करीब पांच माह पहले ही आदेश किया जा चुका है। तीन दिसंबर के पत्र में जिस मामले का हवाला दिया गया है, वह मामला तहसील में चल ही नहीं रहा।
बड़हलगंज के ओझौली गांव के 55 वर्षीय अरविंद ओझा का अपने पट्टीदार अमरनाथ और श्रवण से ट्रस्ट की जमीन के बंटवारे को लेकर विवाद था। यह झगड़ा उनके बाबा रामप्यारे के समय से चला आ रहा था। अरविंद गांव के ही एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाते थे। परिवार में उनके अलावा 80 वर्षीय मां धर्मा देवी है। पत्नी की 10 साल पहले ही मौत हो गई थी। मुकदमे की पैरवी के लिए भागदौड़ के चक्कर में कुछ दिन पहले उन्होंने नौकरी छोड़ दी थी। भागदौड़ के बाद भी कोई नतीजा न निकलने पर तीन दिसंबर को एसडीएम गोला और एसओ बड़हलगंज आदि अफसरों को पत्र भेजकर उन्होंने चेतावनी दी थी। उसमें कहा था कि 11 दिसंबर तक अगर मामले का निस्तारण नहीं हुआ तो 12 की सुबह गांव के शिवमंदिर पर आत्मदाह कर लेंगे।
झुमला बाजार प्रतिनिधि के मुताबिक शुक्रवार सुबह अरविंद गांव के बाहर शिवमंदिर पर पहुंचे। पूजापाठ करने के बाद मंदिर के बाहर एसडीएम गोला मोतीलाल सिंह को अपने प्रार्थना पत्र का अवलोकन करने की बात लिखकर उसने मुकदमे से संबंधित सभी दस्तावेज जला दिए। इसके बाद सुबह 11 बजे के करीब रस्सी से दोनो पैर बांध अपने ऊपर केरोसिन डाल आग लगाकर जान दे दी। जिलाधिकारी रंजन कुमार ने बताया कि एडीएम (वित्त एवं राजस्व) को इस पूरे मामले की जांच कर शाम तक ही रिपोर्ट मुहैया कराने का निर्देश दिया है। रिपोर्ट आने के बाद ही इस बारे में कुछ कहा जा सकता है। मालूम हो कि इससे पहले बस्ती में भी तहसील दिवस पर एक महिला ने जहर खाकर खुदकुशी कर ली थी।