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इटावा: अब ग्रीष्मा के होने वाले शावकों की फ्रिक!

Wed, 22 Jul 2015 12:08 AM IST
Updated Wed, 22 Jul 2015 12:08 AM IST
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Two infant sudden death in Itava lion safari.

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट लॉयन सफारी में दो शावकों की मौत से पसरा मातम तो खत्म नहीं हुआ है। अलबत्ता शासन ने मौत के कारण तलाशने अवश्य शुरू कर दिए हैं ताकि यहां दूसरी गर्भवती शेरनी ग्रीष्मा से होने वाले शावक बचाए जा सकें।

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मंगलवार को प्रमुख वन संरक्षक रूपक डे यहां पहुंचे और दिन भर सफारी में जमे रहे। हॉस्पिटल में बैठकर उन्होंने सीसीटीवी फुटेज खंगाले। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने जानने का प्रयास किया कि किन परिस्थितियों में शावकों की मौत हुई।
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इन फुटेज से उन्होंने क्या हासिल किया? फिलहाल यह जाहिर नहीं हुआ है। दरअसल सफारी से जुड़े अफसरों ने मौन साध रखा है। खुद रूपक डे ने शाम तक मीडिया से बात नहीं की। उधर मीडिया कर्मियों को सफारी में घुसने की मनाही भी रही।
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गौरतलब है कि लॉयन सफारी में हीर नाम की शेरनी ने गत शनिवार को दो शावकों को जन्म दिया था लेकिन एक-एक कर दोनों की मौत की खबरें मिलीं। यह मसला इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि लॉयन सफारी सीएम का ड्रीम प्रोजेक्ट है, जिसे उनके पिता सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने देखा था।

जाहिर है कि इसके महत्व को देखते हुए ही सरकार ने इस प्रोजेक्ट पर करीब 90 करोड़ रुपये खर्च करने का मन बनाया। गुजरात और हैदराबाद से एशियाटिक प्रजाति के शेर मंगाए। उनकी संख्या बढ़ाने के लिए प्रजनन केंद्र बनवाया। कुल मिलाकर सीएम समेत शासन के आला अफसर इस प्रोजेक्ट की एक-एक गतिविधि पर पैनी नजर रखते हैं।

शेरों की मौत की सफारी

Two infant sudden death in Itava lion safari.

इतनी कवायद के बाद भी यह प्रोजेक्ट सवालों के घेरे में है। वे कौन से कारण हैं कि जिनकी वजह से शेर और शावकों की मौत हुई? इस सवाल का जवाब मिलना बाकी है। इससे पहले भी हैदराबादी बब्बर शेर के जोड़े विष्णु और लक्ष्मी ने यहां दम तोड़ा। इन शेरों की मौत से शासन और प्रशासन हिल गया था।

अब तो यहां चर्चा होने लगी है कि ये तो शेरों के मौतों की सफारी बन गई है। किसी तरह मौत का गम कम हुआ और अर्से बाद एक अच्छी खबर लोगों के बीच तक पहुंची, लेकिन यह खबर एक दिन भी न टिक सकी। जिस हीर नाम की शेरनी ने गत शनिवार को दो शावकों को जन्म दिया था। उनमें से एक की मौत तो जन्म के दौरान ही हो गई थी जबकि दूसरे शावक की मौत गत सोमवार को हो गई।

प्रजनन की बजाय मौत की खबरों की सुर्खियां बनने से शासन न सिर्फ चिंतित है बल्कि उसे अब एक अन्य ग्रीष्मा नाम की गर्भवती शेरनी के शावकों को बचाने की चिंता सता रही है। माना जा रहा है कि शासन की इसी चिंता के चलते मुख्य वन संरक्षक रूपक डे मंगलवार को दिन शुरू होने के साथ लॉयन सफारी में मौजूद थे। वह सुबह करीब 9 बजे यहां आ पहुंचे थे और दिन ढलने तक लॉयन सफारी के हॉस्पिटल में ही जमे रहे।

इतना रहस्यमय क्यों बना रहे अफसर?

Two infant sudden death in Itava lion safari.

सूत्र बताते हैं कि श्री डे ने पिछले चार दिनों की सीसीटीवी फुटेज को बेहद बारीकी से देखा। हीर शेरनी का अपने शावकों के प्रति कैसा रवैया रहा। उसने शावकों को दूध पिलाया या नहीं। शावकों की मौत किन हालात में हुई आदि ऐसे कई कारणों को खोजने का प्रयास होता रहा।

मीडिया कर्मियों को उम्मीद थी कि श्री डे बात करके कारणों का खुलासा करेंगे लेकिन सफारी के गेट पर काफी इंतजार के बाद भी मंगलवार की शाम तक उनसे संपर्क नहीं हो सका जबकि मोबाइल से संपर्क तो पिछले चार दिनों से संभव नहीं हुआ है। सफारी प्रशासन के इस रवैये से लोगों के मन में और अधिक शंकाएं घर कर रहीं हैं।

शावकों के दोनों शव बरेली भेजे गए
सफारी में मौत के शिकार हुए दोनों शावकों के शवों को आईबीआरई बरेली में जांच के लिए भेजा गया है। पहले शावक का शव दो दिन पहले और दूसरे का गत सोमवार को भेजा गया है। सूत्रों के अनुसार शावक जैसी स्थिति में थे। उन्हें उसी हालत में पैक करके भेजा गया है। अब जांच रिपोर्ट के बाद ही मौत के कारण स्पष्ट होने की संभावना है।

गर्भवती ग्रीष्मा का भी समय पूरा
शेरनी हीर और ग्रीष्मा कमोबेश एक ही समय में गर्भवती हुई थी। दोनों के बीच महज 4 दिन का अंतर माना जा रहा है। हीर ने 107 दिन गर्भकाल पर शावकों को जन्म दिया था। उस समय ग्रीष्मा के गर्भ को 103 दिन पूरे हुए थे। ऐसा सफारी के सूत्रों का कहना रहा है। जाहिर है कि शेरनी के 105 दिन के औसत गर्भकाल को देखते हुए ग्रीष्मा का समय भी पूरा हो चुका है। ऐसे में वह कभी भी शावकों को जन्म दे सकती है।

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