छोटे से गांव की दो युवतियों ने किया समलैंगिक विवाह
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महानगरों में समलैंगिक शादियों के मुद्दे पर बहस होती रही है। कुछ संगठन इसके लिए कानून बनाने की आवाज भी उठा रहे हैं लेकिन छोटे शहरों और गांवों में अभी इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती।
लेकिन परंपराएं तोड़ते हुए कासगंज के गांवों की दो युवतियों ने समलैंगिक विवाह कर सबको चौंका दिया है। शनिवार को यह मामला थाने में पहुंचा। अब सोमवार को पुलिस न्यायालय में दोनों के बयान कराएगी।
समलैंगिक विवाह करने वाली युवतियों में नन्हीं (25) गांव रामसिंहपुरा की रहने वाली है, जबकि सपना (19) गांव रामपुर नगरिया की। शनिवार को इन्होंने कोतवाली में आपस में शादी करने की बात कहते हुए एक शपथ पत्र वरिष्ठ उपनिरीक्षक को सौंपा।
कुछ देर बाद इनके परिजन भी कोतवाली पहुंच गए। वरिष्ठ उपनिरीक्षक ने उनसे बात की और उनके प्रपत्रों का परीक्षण किया। नन्हीं और सपना ने 14 अप्रैल को नोटरी अधिवक्ता के माध्यम से ये शपथ पत्र तैयार कराया है।
लड़के की तरह रहती हैं नन्हीं
दो गवाहों ने इस शादी नामा की औपचारिकता भी पूरी की। नन्हीं और सपना ने बताया कि वह लगभग डेढ़ वर्ष से एक दूसरे का साथ निभाते हुए जीवन जीने का सपना देख रहीं थीं, जो अब साकार हुआ है।
नन्हीं ने भले ही अपना नाम न बदला हो लेकिन लिबास जरूर बदला है। वह लड़कों की तरह रहती और कपड़े पहनती है। इस शादी में भी सपना के साथ वह दूल्हे की भूमिका में है और सपना के भरण पोषण का जिम्मा भी संभाला है।
वह स्वयं गांव में एक छोटी सी परचून की दुकान चलाती है। सपना ने भी थाने में उसके साथ विवाह करने की बात को स्वीकार करती है। दोनों बहुत अधिक पढ़ी लिखी नहीं है और प्राइमरी स्तर तक ही इनकी शिक्षा हुई है। इन्हें अब न गांव समाज की चिंता है और उनके तानों की। बेफिक्र होकर एक साथ जिंदगी बिताना चाहती है।
वरिष्ठ अधिवक्ता कैलाश राजपूत का इस संबंध में कहना है कि भारत में समलैंगिक विवाह की मान्यता देने के संबंध में कोई कानून नहीं है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में समलैंगिक विवाह को मान्यता दी है।