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दिल्ली: बवाना में भीषण आग, दो मासूमों की मौत

Fri, 12 Apr 2013 09:34 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Fri, 12 Apr 2013 09:34 PM IST
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two children charred to death in fire at bawana slum

बवाना की जेजे कालोनी के पास स्थित झुग्गियों में शुक्रवार दोपहर भीषण आग लग गई। आग में पांच सौ झुग्गियां जलकर राख हो गई।

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हादसे में दो मासूमों की मौत हो गई जबकि छह लोग झुलस गए। सभी घायलों को उपचार के लिए महर्षि बाल्मिकी अस्पताल में दाखिल करवाया गया। जहां से 40 फीसदी झुलसे मोहम्मद सिराज को लोकनायक अस्पताल भेज दिया गया। जबकि अन्य पांच को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई।

मौके पर पहुंची दमकल की 22 गाड़ियों ने करीब तीन घंटे में आग पर काबू पा लिया। आशियाना जलने की वजह से वहां रहने वाले करीब तीन हजार लोग बेघर हो गए हैं।

आक्रोषित लोगों ने एक दमकल की गाड़ी का शीशा तोड़ दिया और दमकलकर्मियों पर पथराव कर दिया। जिसमें चार दमकलकर्मी जख्मी हो गए। बताया जा रहा है कि खाना बनाने के दौरान सिलेंडर ब्लास्ट होने की वजह से हादसा हुआ है। फिलहाल आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है।
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बवाना की जेजे कालोनी के जी ब्लॉक में करीब एक हजार झुग्गियां है। दोपहर डेढ़ बजे इन झुग्गियों में आग लगने की सूचना दमकल विभाग को मिली। सूचना मिलते ही दिल्ली के कई कार्यालयों से दमकल की 22 गाड़ियों को मौके पर भेजा गया। दमकल कर्मियों पर पथराव होने की वजह से उनके चार कर्मचारी सुखदेव, राकेश, जसवंत और संजीव घायल हो गये। जिसमें से संजीव की हालत गंभीर है।
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विरोध के बाद दमकल कर्मियों ने आग बुझाने का काम शुरू किया। हवा तेज और सिलेंडर विस्फोट होने की वजह से आग तेजी से फैली और कुछ ही देर में आग ने भीषण रूप ले लिया और पांच सौ झुग्गियों को अपने चपेट में ले लिया। झुग्गियों से सामान निकालने के क्रम में छह लोग मामूली रूप से झुलस गए।

दमकल कर्मियों और पुलिस ने सभी को बाहर निकालकर उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया। सभी दस से बारह फीसदी तक झुलस गए हैं। जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। उनकी पहचान भूरा, ओमप्रकाश, मोहम्मद हासिम, देवीलाल, कलावती और महबूब के रूप में हुई।

दमकल कर्मियों ने मशक्कत कर डेढ़ घंटे में आग पर काबू पा लिया। लेकिन उसे पूरी तरह से बुझाने में तीन घंटे लग गए। उसके बाद तलाशी के दौरान दमकल कर्मियों ने दो मासूमों सरताज (5) और मनीष (4) का शव बाहर निकाला। दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया गया। आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है।


दादी नही बचा सकी मासूम मनीष को
मनीष के माता-पिता फैक्टरी में काम करते हैं। जबकि उसकी दादी कलावती घर में उसके साथ मौजूद थी। आग लगने पर बुजुर्ग महिला घर से भागी, लेकिन इस दौरान उसे ध्यान नहीं रहा कि उसका पोता घर में है। ध्यान आने पर जब वह वापस आई तब तक उसकी झुग्गी में आग लग चुकी थी और मनीष इसके चपेट में आ चुका था। घटना के बाद से मनीष की मां उषा का रो-रोकर बुरा हाल है।

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