फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   two brahman sacrificed for narendra modi in bjp

मोदी की खातिर भाजपा में दो ब्राह्मणों की कुर्बानी

Fri, 21 Mar 2014 11:41 PM IST
संजय मिश्र/अमर उजाला, नई दिल्ली
संजय मिश्र/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 21 Mar 2014 11:41 PM IST
विज्ञापन
two brahman sacrificed for narendra modi in bjp

इसे राजनीतिक समीकरणों की जरूरत कहें या फिर महज संयोग मगर फिलहाल हकीकत तो कुछ ऐसी ही बन पड़ी है कि प्रधानमंत्री पद की दावेदारी की उड़ान भर रहे भाजपा के चुनावी चेहरे नरेंद्र मोदी के लिए उत्तरप्रदेश ही नहीं गुजरात में भी पार्टी के ब्राह्मण नेता को अपनी सीट की कुर्बानी देनी पड़ी है।

विज्ञापन


वाराणसी से जहां उत्तरप्रदेश से भाजपा के सबसे बड़े ब्राह्मण चेहरे मुरली मनोहर जोशी को अनमने ढंग से काशी को त्यागना पड़ा वहीं वडोदरा से बालू शुक्ला को मोदी के लिए अपनी संसदीय सीट छोड़नी पड़ी है।
विज्ञापन


वाराणसी सीट तो जोशी कहीं से छोड़ने को तैयार नहीं थे। लेकिन मोदी के लिए उन्हें भाजपा हाईकमान ने कानपुर शिफ्ट कर दिया।

जोशी और शुक्ला पर भारी पड़े मोदी

two brahman sacrificed for narendra modi in bjp

जोशी किस तरह वाराणसी के लिए लालायित थे इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उन्होंने एकबारगी तो यहां तक कह दिया कि पाप किया तो संसद गया और पुण्य किए तो काशी मिली।

लेकिन जोशी की भावनाएं भाजपा में मोदी के सियासी पराक्रम के आगे बौनी साबित हुईं। मन मसोस कर उन्हें काशी छोड़ कानपुर का रुख करना पड़ा।

हालांकि वडोदरा से सांसद बालू शुक्ला मोदी के लिए अपनी सीट की कुर्बानी देने पर कोई टीस जाहिर नहीं कर रहे बल्कि इसके उलट वह अपना गौरव समझते हैं।

बदल रही राजनीति में ब्राह्मण कहां?

two brahman sacrificed for narendra modi in bjp

शुक्ला ने ‘अमर उजाला’ से कहा कि उनके लिए यह कुर्बानी नहीं बल्कि हर्ष की बात है। जो व्यक्ति देश का प्रधानमंत्री बनने जा रहा है उसके लिए सीट छोड़ना उनके लिए किसी गौरव से कम नहीं है। बालू शुक्ला वैसे तो चार-पांच पीढ़ियों से गुजरात में रह रहे हैं मगर उनके पुरखों की जड़ें महाराष्ट्र और उत्तरप्रदेश में रही हैं।

इस चुनाव में मोदी को पीएम बनाने के लिए पिछड़ा कार्ड खुलकर खेल रही भाजपा अपने इस दांव को भुनाने के लिए वाराणसी और वडोदरा का यह प्रयोग सीधे न सही मगर परोक्ष रूप से तो दिखा ही सकती है। खासकर यह देखते हुए कि जब एक समय में प्रधानमंत्री बनने के लिए ब्राह्मण होना करीब-करीब एक अनिवार्य योग्यता होती थी।

जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी, मोरारजी देसाई, राजीव गांधी, पीवी नरसिम्हा राव और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे ब्राह्मण चेहरों ने बतौर प्रधानमंत्री देश पर लंबे समय तक राज किया। लेकिन अब देश की राजनीति का चरित्र साफ तौर पर बदलता दिखाई दे रहा है। अब यह अनिवार्यता निश्चित रूप से हाशिए पर जा चुकी है। कांग्रेस हो या फिर भाजपा यह अनिवार्यता अब इनके लिए भी मायने नहीं रखती है। वैसे भी बदलते जातीय-सियासी समीकरणों में राजनीतिक दलों का इसके अनुरूप दांव चलना कोई अजूबा नहीं।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed