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हैदराबाद आतंकी ब्लास्ट में 14 मरे, 84 घायल
हैदराबाद/नई दिल्ली/एजेंसी
Updated Fri, 22 Feb 2013 09:10 AM IST
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हैदराबाद के दिलसुखनगर में एक भीड़ भरे बस स्टैंड और एक व्यस्त इलाके
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में दो शक्तिशाली बमों के एक के बाद एक धमाकों से 14 व्यक्तियों की मौत हो गई
और करीब 119 लोग घायल हुए। (फोटो देखें) गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने हैदराबाद
पहुंचकर घटनास्थल का दौरा किया। गृहमंत्री आज बम धमाकों में घायल हुए लोगों
से भी मुलाकात करेंगे।
100-150 मीटर के दायरे में हुए इन दोनों धमाकों में आईईडी का इस्तेमाल किया गया, जिसे साइकिल पर बांध कर रखा गया था। विस्फोट में इस्तेमाल सामग्री और इसे अंजाम देने के तरीके से शक की सुई इंडियन मुजाहिदीन की तरफ घूम रही है।
सरकार ने धमाकों को आतंकी हमला माना है, हालांकि उसने कहा है कि इसमें किसका हाथ है यह बात जांच के बाद ही साफ होगी। एनआईए और दिल्ली से देर रात हैदराबाद पहुंची एनएसजी की टीम मौके पर सुबूत तलाशने में जुट गई हैं।
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पहला धमाका कोणार्क थिएटर के बाहर एक रेस्तरां के पास शाम 6:58 बजे हुआ, जबकि दूसरा धमाका इसके तीन मिनट बाद वेंकटाद्री हॉल के पास हुआ। जहां ये धमाके हुए वहीं पास में बस स्टैंड भी है। शाम को इस इलाके में खासी भीड़भाड़ रहती है।
धमाकों के बाद वहां भगदड़ और अफरातफरी मच गई। मौके पर हर तरफ खून बिखरा हुआ था। घायलों को विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जिनमें पांच-छह लोगों की हालत बेहद गंभीर है। धमाकों के बाद पुलिस ने इलाके की घेराबंदी कर ली है।
राज्य के डीजीपी दिनेश रेड्डी ने धमाकों को आतंकी करतूत करार देते हुए बताया कि मरने वालों में एक महिला भी है। गृह सचिव आरके सिंह ने भी कहा कि धमाके काफी ज्यादा तीव्रता वाले थे और जिस तरह एक साथ दो धमाके हुए उससे साफ है कि इसमें आतंकियों का हाथ है।
गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कहा कि मैंने राज्य के मुख्यमंत्री किरण रेड्डी से बात की है। उन्होंने मुझे बताया है कि पहले ब्लास्ट में आठ लोगों और दूसरे में चार लोगों की जान गई। मरने वालों की संख्या बढ़ भी सकती है।
उन्होंने कहा कि जांच के बाद ही पता चलेगा धमाके क्यों किए गए और इसके पीछे किसका हाथ है। शिंदे ने कहा कि यह धमाके पांच साल पहले गोकुल चाट शॉप के पास हुए धमाकों जैसे ही हैं। स्थिति का जायजा लेने गृह मंत्री शुक्रवार को हैदराबाद पहुंच सकते हैं।
अफजल की फांसी का बदला तो नहीं
सूत्रों का कहना है कि केंद्र सरकार ने 19 और 20 फरवरी को सभी प्रमुख शहरों के लिए अलर्ट जारी किया था। इसमें कहा गया था कि संसद हमले के दोषी अफजल गुरू और मुंबई हमले में शामिल आतंकी अजमल कसाब की फांसी का बदला लेने के लिए पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन किसी हमले को अंजाम दे सकते हैं।
दिलसुखनगर में 2002 में भी प्रसिद्ध साईंबाबा मंदिर के पास धमाका हुआ था। इसमें दो लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 20 से ज्यादा घायल हो गए थे।
धमाके काफी ज्यादा तीव्रता वाले थे और जिस तरह एक साथ दो धमाके हुए उससे साफ है कि इसमें आतंकियों का हाथ है। हालांकि अभी तक किसी संगठन ने इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है।--आरके सिंह, गृह सचिव
कैबिनेट की चल रह थी बैठक
जिस वक्त हैदराबाद में धमाके हुए तब दिल्ली में केंद्रीय कैबिनेट की बैठक चल रही थी। यह सूचना आने पर गृहमंत्री शिंदे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह समेत पूरी कैबिनेट को घटना की जानकारी दी।
गुनहगार बच नहीं पाएंगे: मनमोहन
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि हैदराबाद में सीरियल ब्लास्ट को अंजाम देने वाले गुनहगार कानून के शिकंजे से बच नहीं पाएंगे। धमाकों की तीखी निंदा करते हुए प्रधानमंत्री ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने ब्लास्ट में मारे गए लोगों के परिजनों के लिए दो लाख रुपये और घायलों के लिए 50 हजार रुपये के मुआवजे का ऐलान किया है।
मैं देश के नागरिकों से अपील करता हूं कि वे संकट की इस घड़ी में शांति बनाए रखें। - हामिद अंसारी, उपराष्ट्रपति
हैदराबाद में ब्लास्ट में कइयों की जान चली गई, जबकि कई घायल हो गए। यह दुखद है। मैं इस घटना की गहन जांच की मांग करता हूं। साथ ही मैं उम्मीद करता हूं कि सरकार विस्फोट पीड़ितों को तत्काल राहत उपलब्ध कराने के लिए उचित कदम उठाएगी। - राजनाथ सिंह, भाजपा अध्यक्ष
मैं हैदराबाद ब्लास्ट की निंदा करता हूं और प्रदेश के मुख्यमंत्री से अपील करता हूं कि वे इस मामले की गहन छानबीन कराएं तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें। - के. चिरंजीवी, केंद्रीय पर्यटन मंत्री
धमाके की घटना दुखद है। मेरी संवेदना विस्फोट में मारे गए लोगों के परिजनों और घायल हुए लोगों के साथ है। मैं प्रार्थना करता हूं कि वहां शांति बनी रहे। - नरेंद्र मोदी, गुजरात के सीएम
कब-कब हुए सीरियल ब्लास्ट
13 जुलाई, 2011 : मुंबई में झवेरी बाजार, दादर और ओपेरा हाउस में विस्फोट, 26 की मौत, 141 घायल।
29 सितंबर, 2008 : बांसकांठा और मालेगांव में हुए धमाकों में सात की मौत, 122 घायल।
13 सितंबर, 2008 : दिल्ली में छह धमाके, 27 की मौत और 150 घायल।
26 जुलाई, 2008 : अहमदाबाद में 16 सीरियल ब्लास्ट, 50 मरे और 100 जख्मी।
13 मई, 2008 : जयपुर में आठ धमाके, 70 की मौत और 200 घायल।
23 नवंबर, 2007 : लखनऊ, वाराणसी और फैजाबाद कचहरी में धमाके, 13 मरे और 60 घायल।
100-150 मीटर के दायरे में हुए इन दोनों धमाकों में आईईडी का इस्तेमाल किया गया, जिसे साइकिल पर बांध कर रखा गया था। विस्फोट में इस्तेमाल सामग्री और इसे अंजाम देने के तरीके से शक की सुई इंडियन मुजाहिदीन की तरफ घूम रही है।
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सरकार ने धमाकों को आतंकी हमला माना है, हालांकि उसने कहा है कि इसमें किसका हाथ है यह बात जांच के बाद ही साफ होगी। एनआईए और दिल्ली से देर रात हैदराबाद पहुंची एनएसजी की टीम मौके पर सुबूत तलाशने में जुट गई हैं।
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पहला धमाका कोणार्क थिएटर के बाहर एक रेस्तरां के पास शाम 6:58 बजे हुआ, जबकि दूसरा धमाका इसके तीन मिनट बाद वेंकटाद्री हॉल के पास हुआ। जहां ये धमाके हुए वहीं पास में बस स्टैंड भी है। शाम को इस इलाके में खासी भीड़भाड़ रहती है।
धमाकों के बाद वहां भगदड़ और अफरातफरी मच गई। मौके पर हर तरफ खून बिखरा हुआ था। घायलों को विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जिनमें पांच-छह लोगों की हालत बेहद गंभीर है। धमाकों के बाद पुलिस ने इलाके की घेराबंदी कर ली है।
राज्य के डीजीपी दिनेश रेड्डी ने धमाकों को आतंकी करतूत करार देते हुए बताया कि मरने वालों में एक महिला भी है। गृह सचिव आरके सिंह ने भी कहा कि धमाके काफी ज्यादा तीव्रता वाले थे और जिस तरह एक साथ दो धमाके हुए उससे साफ है कि इसमें आतंकियों का हाथ है।
गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कहा कि मैंने राज्य के मुख्यमंत्री किरण रेड्डी से बात की है। उन्होंने मुझे बताया है कि पहले ब्लास्ट में आठ लोगों और दूसरे में चार लोगों की जान गई। मरने वालों की संख्या बढ़ भी सकती है।
उन्होंने कहा कि जांच के बाद ही पता चलेगा धमाके क्यों किए गए और इसके पीछे किसका हाथ है। शिंदे ने कहा कि यह धमाके पांच साल पहले गोकुल चाट शॉप के पास हुए धमाकों जैसे ही हैं। स्थिति का जायजा लेने गृह मंत्री शुक्रवार को हैदराबाद पहुंच सकते हैं।
अफजल की फांसी का बदला तो नहीं
सूत्रों का कहना है कि केंद्र सरकार ने 19 और 20 फरवरी को सभी प्रमुख शहरों के लिए अलर्ट जारी किया था। इसमें कहा गया था कि संसद हमले के दोषी अफजल गुरू और मुंबई हमले में शामिल आतंकी अजमल कसाब की फांसी का बदला लेने के लिए पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन किसी हमले को अंजाम दे सकते हैं।
दिलसुखनगर में 2002 में भी प्रसिद्ध साईंबाबा मंदिर के पास धमाका हुआ था। इसमें दो लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 20 से ज्यादा घायल हो गए थे।
धमाके काफी ज्यादा तीव्रता वाले थे और जिस तरह एक साथ दो धमाके हुए उससे साफ है कि इसमें आतंकियों का हाथ है। हालांकि अभी तक किसी संगठन ने इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है।--आरके सिंह, गृह सचिव
कैबिनेट की चल रह थी बैठक
जिस वक्त हैदराबाद में धमाके हुए तब दिल्ली में केंद्रीय कैबिनेट की बैठक चल रही थी। यह सूचना आने पर गृहमंत्री शिंदे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह समेत पूरी कैबिनेट को घटना की जानकारी दी।
गुनहगार बच नहीं पाएंगे: मनमोहन
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि हैदराबाद में सीरियल ब्लास्ट को अंजाम देने वाले गुनहगार कानून के शिकंजे से बच नहीं पाएंगे। धमाकों की तीखी निंदा करते हुए प्रधानमंत्री ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने ब्लास्ट में मारे गए लोगों के परिजनों के लिए दो लाख रुपये और घायलों के लिए 50 हजार रुपये के मुआवजे का ऐलान किया है।
मैं देश के नागरिकों से अपील करता हूं कि वे संकट की इस घड़ी में शांति बनाए रखें। - हामिद अंसारी, उपराष्ट्रपति
हैदराबाद में ब्लास्ट में कइयों की जान चली गई, जबकि कई घायल हो गए। यह दुखद है। मैं इस घटना की गहन जांच की मांग करता हूं। साथ ही मैं उम्मीद करता हूं कि सरकार विस्फोट पीड़ितों को तत्काल राहत उपलब्ध कराने के लिए उचित कदम उठाएगी। - राजनाथ सिंह, भाजपा अध्यक्ष
मैं हैदराबाद ब्लास्ट की निंदा करता हूं और प्रदेश के मुख्यमंत्री से अपील करता हूं कि वे इस मामले की गहन छानबीन कराएं तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें। - के. चिरंजीवी, केंद्रीय पर्यटन मंत्री
धमाके की घटना दुखद है। मेरी संवेदना विस्फोट में मारे गए लोगों के परिजनों और घायल हुए लोगों के साथ है। मैं प्रार्थना करता हूं कि वहां शांति बनी रहे। - नरेंद्र मोदी, गुजरात के सीएम
कब-कब हुए सीरियल ब्लास्ट
13 जुलाई, 2011 : मुंबई में झवेरी बाजार, दादर और ओपेरा हाउस में विस्फोट, 26 की मौत, 141 घायल।
29 सितंबर, 2008 : बांसकांठा और मालेगांव में हुए धमाकों में सात की मौत, 122 घायल।
13 सितंबर, 2008 : दिल्ली में छह धमाके, 27 की मौत और 150 घायल।
26 जुलाई, 2008 : अहमदाबाद में 16 सीरियल ब्लास्ट, 50 मरे और 100 जख्मी।
13 मई, 2008 : जयपुर में आठ धमाके, 70 की मौत और 200 घायल।
23 नवंबर, 2007 : लखनऊ, वाराणसी और फैजाबाद कचहरी में धमाके, 13 मरे और 60 घायल।