यूपी में ‘सपाई गढ़ों’ को मिल रही 24 घंटे बिजली
भीषण गर्मी में बढ़ी मांग और उस पर छह विद्युत उत्पादन इकाईयों के ठप रहने से सूबे में 4800 मेगावाट की कमी से जबरदस्त बिजली संकट गहराया है, लेकिन इटावा, मैनपुरी और कन्नौज में संकट नाम भर का भी नहीं।
इन तीनों वीवीआईपी जिलों में विद्युत संकट के दौर में भी 23-24 घंटे आपूर्ति हो रही है, जबकि आगरा में ताजमहल के कारण सुप्रीम कोर्ट के 24 घंटे बिजली देने के आदेश के बाद भी महज 14:58 घंटे आपूर्ति हुई।
दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम (डीवीवीएनएल) क्षेत्र के अन्य जिलों में तो देहात में महज छह घंटे और शहर में 12 घंटे आपूर्ति ही दी जा रही है।
समाजवादी पार्टी के गढ़ रहे इटावा, मैनपुरी और कन्नौज के गांव को भी 16 से 18 घंटे बिजली मिल रही है, जबकि उनके मुख्यालयों को पूरे 24 घंटे।
सुप्रीम कोर्ट पर भारी पड़ी सत्ता
9 और 10 सितंबर को पूरे प्रदेश में 4800 मेगावाट की किल्लत रही थी। 11 हजार मेगावाट की डिमांड में यह 45 फीसदी की कमी थी, फिर भी सपा सरकार इटावा, कन्नौज और मैनपुरी पर ही मेहरबान रही।
दक्षिणांचल के एटा, हाथरस, कासगंज, मथुरा, झांसी, महोबा, अलीगढ़, बांदा, हमीरपुर जिलों के हालात बेहद खराब रहे। वहां गांव में महज छह घंटे और शहर में 9 से 12 घंटे के बीच ही आपूर्ति हो पाई।
दक्षिणांचल क्षेत्र के जिलों से लखनऊ कंट्रोल रूम को भेजी गई रिपोर्ट में साफ लिखा गया है कि 400 केवी पीलीपोखर से रोस्टरिंग की गई। इस रिपोर्ट में हैरतअंगेज पहलू ये है कि जिन जिलों में आपूर्ति 11 से 14 घंटे रही, उन इलाकों को टीटीजेड क्षेत्र से बाहर बताया गया है।
जबकि टीटीजेड क्षेत्र को भी 14 से 16 घंटे ही आपूर्ति दी गई। मथुरा के गांवों को महज 6:28 घंटे बिजली दी गई। जबकि पड़ोसी फीरोजाबाद को 16 और 18 घंटे।