हिंदुत्व पर संघ का मोदी सरकार से टकराव तेज
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मोदी सरकार का भावी एजेंडा महज विकास हो अथवा विकास और हिंदुत्व दोनों साथ-साथ चलें। इस मुद्दे पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, भाजपा और सरकार के बीच अंदरखाने बहस शुरू हो गई है। इस बीच, संघ परिवार द्वारा शुरू किए गए हिंदूवादी एजेंडे से उपजे विवाद ने इस बहस को गंभीर रूप दे दिया है।
विहिप, बजरंग और संघ से भाजपा में भेजे गए ज्यादातर नेता विकास और हिंदुत्व दोनों को एजेंडे में शामिल करने के पक्षधर हैं, जबकि मोदी सरकार के वरिष्ठ मंत्री और भाजपा नेता फिलहाल हिंदुत्व के एजेंडे को किनारे रख कर वर्ष 2017 तक पीएम के विकास के एजेंडे पर काम करना चाहते हैं।
खास बात यह है कि भाजपा की ओर से चिंता जताने के बाद संघ अचानक शुरू किए गए अपने हिंदूवादी एजेंडे पर विचार के पक्ष में है, लेकिन विहिप और बजरंग दल अपने ‘घर वापसी’ (धर्मांतरण) के मुद्दे को छोड़ने को तैयार नहीं हैं।
संघ, भाजपा और सरकार की समन्वय बैठक
माना जा रहा है कि एजेंडे पर मतभेद के कारण संसद के शीत सत्र के बाद संघ, भाजपा और सरकार की समन्वय बैठक हो सकती है। वैसे संघ के हिंदूवादी एजेंडे पर अपने बयान से सरकार के लिए मुसीबत खड़ी करने वाले सांसदों की खुद पीएम मंगलवार को क्लास लेंगे। साथ ही पार्टी की संसदीय दल की बैठक में आधिकारिक वक्ताओं के अलावा अन्य सांसदों को मीडिया से दूरी बरतने की सख्त हिदायत दी जाएगी।
दरअसल संघ ने सहमति के अनुरूप अनुच्छेद 370, राम मंदिर और समान नागरिक संहिता पर तो चुप्पी साध रखी है, मगर लव जेहाद, धर्मांतरण जैसे मुद्दों पर मुखर रुख अपना कर सरकार और भाजपा की परेशानी बढ़ा दी है।
इसी वजह से संघ, भाजपा और सरकार में भावी एजेंडे पर अंदरखाने बहस तेज हो गई है। पार्टी और सरकार के रणनीतिकार यूपी, बिहार में जड़ें जमाने और दिल्ली विधानसभा चुनाव जीतने के लिए फिलहाल मोदी के विकास के एजेंडे पर ही चलना चाहते हैं।
संघ का भी एक धड़ा चिंतित
संघ विवाद के बाद स्थिति की समीक्षा के लिए तैयार है। मगर शिक्षा के क्षेत्र में सुझावों पर अमल न होने, श्रम कानूनों में संशोधन के मामले में भी आपत्तियों पर गौर नहीं किए जाने और स्वदेशी के मुद्दे पर चुप्पी साधने से संघ का एक धड़ा चिंतित है। इन मुद्दों पर संघ अपने अनुषांगिक संगठनों के भी दबाव में है।