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वाह रे सरकारी तंत्र, 31 साल में नहीं बनी एक सुंरग

Wed, 20 Mar 2013 12:52 AM IST
पीयूष पांडेय/नई दिल्ली
पीयूष पांडेय/नई दिल्ली Updated Wed, 20 Mar 2013 12:52 AM IST
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tunnel uttarakhand

31 साल पहले उत्तरकाशी में एक सुरंग बनाने का काम शुरू हुआ था, जो अब तक पूरा नहीं हो सका।

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पहले उत्तर प्रदेश फिर उत्तराखंड के सरकारी विभागों ने जमकर जनता का पैसा लुटाया।

बाद में आई बाढ़ ठेकेदार की मशीनों को अपने साथ बहा ले गई। इसके चलते निर्माण कार्य तो नहीं हुआ पर राज्य सरकार और ठेकेदार के बीच ठन गई।

इस हकीकत से रूबरू हुए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के सरकारी विभागों के अधिकारियों की लापरवाही पर सख्त नाराजगी जताई है।

अदालत ने कहा कि तीन दशकों में सरेआम सार्वजनिक धन लुटाया गया पर काम नहीं हुआ। ऐसा सरकारी बाबुओं की लापरवाही के बगैर संभव नहीं है।

सर्वोच्च अदालत ने हालांकि राज्य सरकार की ओर से दायर याचिका का भ्रष्टाचार का मुद्दा न उठाए जाने की वजह से मामले का निपटारा कर दिया है।

जस्टिस एसएस निज्जर की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष उत्तराखंड सरकार की ओर से पेश हुए अधिवक्ता डीके गर्ग ने कहा कि मार्च 1981 में मनेरी भाली हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट स्टेज-दो के लिए सुरंग बनाने का बीस करोड़ रुपये से ज्यादा का ठेका इस निर्माण कंपनी को दिया गया था।

उस दौरान 16.77 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था पर काम पूरा नहीं हुआ था। इसके बाद वर्ष 2000 में उत्तराखंड का गठन होने पर ठेकेदार को दोबारा से यही ठेका 129 करोड़ रुपये से भी ज्यादा में दिया गया।
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उसके एवज में उसे 337 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं। लेकिन ठेका लेने वाली कंपनी जानबूझकर नुकसान दिखाकर सरकार से और पैसे ऐंठना चाहती है।

इसके लिए उसकी ओर से ट्राइब्यूनल में कई मामले दायर किए हैं जो तय प्रक्रिया के मुताबिक उचित नहीं है। इसके बावजूद हाईकोर्ट राज्य के पक्ष को अनदेखा कर दिया।
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सर्वोच्च अदालत ने कहा, यह बहुत ही गंभीर मामला है पर राज्य सरकार ने ठेकेदार की ओर से बाढ़ से हुए नुकसान के मामले में हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ याचिका दायर की है।

इसमें राज्य के सरकारी विभागों के बाबुओं की लापरवाही स्पष्ट होती है। लेकिन हाईकोर्ट की ओर से अंतरिम आदेश ही जारी किया है। ऐसे में पीठ अंतरिम आदेश में हस्तक्षेप नहीं करना चाहती। इसलिए राज्य सरकार को 10 हफ्ते में पैसा जमा करने का निर्देश देती है।

हाईकोर्ट ने ठेकेदार को हुए नुकसान के एवज में प्रदेश सरकार को कई करोड़ रुपये मामले के निपटारे तक रजिस्ट्री में जमा करने का आदेश दिया गया है। जबकि राज्य सरकार का कहना था कि बाढ़ से हुए नुकसान के लिए वह जिम्मेदार नहीं है।


साथ ही ठेकेदार हाईडल कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड ने नुकसान की भरपाई के लिए आर्बिट्रेशन ट्राइब्यूनल का दरवाजा खटखटाया था, जिसके आदेश को हाईकोर्ट ने जारी रखा है। उस ट्राइब्यूनल को इस मामले में दखल देने का कोई अधिकार नहीं है।

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