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तुलसी प्रजापति मामले की जांच को भटकाने में फंसे जावड़ेकर!
टीम डिजिटल
Updated Tue, 03 Sep 2013 06:25 PM IST
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वर्ष 2006 में हुए तुलसी प्रजापति फर्जी मुठभेड़ मामले में नया मोड़ आ गया है। एक स्टिंग ऑपरेशन में दावा किया गया है कि भाजपा के तीन बड़े नेता इस मामले की जांच को पटरी से उतारना चाहते थे।
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ऑपरेशन हलफनामा नाम का ये स्टिंग ऑपरेशन पुष्प शर्मा ने किया है। शर्मा ने अपने स्टिंग ऑपरेशन को आधार बनाते हुए भाजपा सांसद प्रकाश जावडेकर और भूपेंद्र सिंह यादव के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पीआईएल दाखिल की है।
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इस पीआईएल याचिका में भाजपा नेताओं पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने तुलसी प्रजापति मुठभेड़ कांड की जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित करने की कोशिश की।
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इस फर्जी मुठभेड़ कांड में गुजरात के पूर्व गृहमंत्री अमित शाह मुख्य आरोपी हैं। यह सब इस कांड में शाह को बचाने और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने के मकसद से किया गया।
इस याचिका के साथ शर्मा ने सर्वोच्च अदालत में अपने स्टिंग ऑपरेशन की सीडी भी दाखिल की है। इसमें दो भाजपा सांसदों को आपस में बात करते हुए दिखाया गया है कि किस तरह कई सादे वकालतनामा पर तुलसी की मां नर्मदा प्रजापति का अंगूठा लगवाया गया।
इस पूरे प्रकरण की जानकारी न केवल गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को थी, बल्कि उन्होंने इस चर्चित मुठभेड़ मामले को निपटाने की जिम्मेदारी राज्य के गृहमंत्री रहे अमित शाह को दे रखी थी।
स्टिंग की सीडी दिखाने के बाद भाजपा नेताओं के करीबी रहे पत्रकार शर्मा ने बताया कि पार्टी प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर, सचिव भूपेंद्र यादव और महासचिव रामलाल ने इस मुठभेड़ मामले में नर्मदा से हलफनामा हासिल कर पूरे मामले की सुनवाई को पटरी से उतारने की योजना बनाई।
तुलसी की मां नर्मदा से छह सादे हलफनामा पेपर पर अंगूठे का निशान लिया गया। शर्मा ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि इन हलफनामों का अब तक उपयोग किया गया है या नहीं।
इस दौरान शर्मा ने दावा किया कि इस मुठभेड़ मामले में जांच और सुनवाई की प्रक्रिया को पटरी से उतारने का जिम्मा मोदी ने अपने करीबी और इस मामले के आरोपी अमित शाह को दे रखा है।