जानिए क्यों गई पत्रकार गजेंद्र की जान, ये है सच
खुटार के कोट मोहल्ले में जगेंद्र सिंह के घर के बाहर शामियाने के नीचे धरना जारी है। उसकी पत्नी, पिता और बच्चों के साथ भाजपा की रागिनी सिंह भी बैठी हैं। बाकी दलों के नेता भी आ-जा रहे हैं।
हाईकोर्ट में 24 की डेट लग गई, शाहजहांपुर कचहरी में मंत्री के खिलाफ कथित गैंगरेप के मामले में भी अगली डेट मिल गई, राज्यपाल ने जगेंद्र के परिवार से बात की ...आदि खबरें विभिन्न चैनलों के पत्रकार अपने-अपने कैमरे के सामने खड़े होकर दे रहे हैं।
खुटार में एक पत्रकार ने जगेंद्र और उसके प्रतिद्वंद्वी अमित भदौरिया की फेसबुक पर डाली गई पोस्ट का पुलिंदा पकड़ाया तो इसे पढ़ कर इस हादसे की पृष्ठभूमि साफ हो गई।
दरअसल यह सपा के दो नेताओं की फेसबुक पर इमेज बनाने-बिगाड़ने की जंग का नतीजा है, जिसमें सोशल मीडिया पर पत्रकारिता करने वाले दो लोग मोहरों की तरह इस्तेमाल हो रहे थे। जगेंद्र उनमें से एक था। जगेंद्र की पोस्ट में अगर सच लिखा है तो मंत्री के खिलाफ एक नहीं कई जांचें होनी चाहिए।
शालीनता की सीमाएं लांघ रही कई पोस्ट
फेसबुक पर लिखी जगेंद्र की पोस्ट के पुलिंदे में मंत्री राममूर्ति के बारे में कई पोल-खोल पोस्ट हैं। एक और पुलिंदा भी है जिसमें जगेंद्र की तरह के पत्रकार अमित भदौरिया की पोस्ट हैं। इनमें राममूर्ति के पक्ष में और पूर्व विधायक देवेंद्रपाल और जगेंद्र के खिलाफ काफी कुछ लिखा गया है। इनमें से कई पोस्ट शालीनता की सीमाएं लांघ रही है।
चार मई से 31 मई तक जगेंद्र ने 39 पोस्ट लिखी हैं। किसी में मंत्री के अवैध खनन और अवैध कब्जे में लिप्त होने का जिक्र है, किसी में उनके कथित अवैध धंधों को संभालने वालों का जिक्र है, कहीं राशन कोटा डकारने का। मंत्री के इन कथित घपलों की लंबी फेहरिस्त है।
जगेंद्र ने मंत्री पर हरेवा कांड के दोषियों को बचाने का भी आरोप लगाया है। बीच- बीच में देवेंद्रपाल की तारीफ भी है। कुछ पोस्ट में इसी तरह मंत्री के पक्ष में फेसबुक पर पोस्ट लिखने वाले अपने पुराने साथी अमित भदौरिया को चेतावनी दी गई। जगेंद्र अमित को दलाल लिखते हैं तो अमित उन्हें ब्लैकमेलर, स्वयंभू पत्रकार।
दोनों अपने-अपने पसंद के नेताओं के पक्ष में खुलकर लिखने के साथ फेसबुक पर चरित्र हनन की लड़ाई लड़ते रहे। ददरौल के विधायक रहे देवेंद्रपाल की सीट से जब राममूर्ति जीत कर विधायक बने तभी से इन दो नेताओं में जंग चल रही है। दोनों को ही फेसबुक पर लिखने वाले पत्रकार मिल गए थे।
अहम है जगेंद्र की महिला मित्र की गवाही
इस बीच हुई घटनाएं भी इन पोस्ट में आ रही हैं। जगेंद्र के इस लेखन के खिलाफ उन पर हमला हुआ, पैर में फ्रैक्चर भी हो गया। इसमें मंत्री पक्ष के लोग नामजद हुए। इसके जवाब में अमित भदौरिया ने जगेंद्र के खिलाफ अपहरण और कातिलाना हमले का मामला दर्ज करा दिया। अब जगेंद्र की बारी थी। उसने अपनी महिला मित्र के साथ गैंगरेप का आरोप लगाते हुए कोर्ट में 156/3 के तहत वाद दाखिल करवा दिया।
असलियत तो पुलिस पड़ताल के बाद पता चलेगी लेकिन लोग बाद के दोनों ही मामलों को फर्जी बताते हैं। कातिलाना हमले के मामले में जब पुलिस जगेंद्र के घर दबिश देने गई तो वहां वह महिला भी मौजूद थी जिसके साथ गैंगरेप का आरोप मंत्री और उनके साथियों पर लगा है।
पुलिस कहती है कि वह घर के अंदर मौजूद थी लेकिन जगेंद्र के परिवार वाले कहते हैं पुलिस उसे लेकर गई थी। जगेंद्र के परिवार वाले तो अब यह भी कह रहे हैं कि उसका बेटा राजन भी प्रत्यक्षदर्शी है।
पुलिस कहती है जगेंद्र ने खुद आग लगाई जबकि जगेंद्र ने मुत्यपूर्व बयान में कहा था कि पुलिस मंत्री के लोगों के साथ दीवार फांद कर घुसी और उस पर पेट्रोल छिड़क कर आग लगा दी। महिला के पति की मौत हो चुकी है। जगेंद्र का वह साथ दे रही थी। उसकी मौत के वक्त तक लखनऊ में जगेंद्र के साथ रही लेकिन अब कहां है किसी को नहीं पता। दोनों पक्ष उसे प्रत्यक्षदर्शी मान रहे हैं, इसलिए इस केस में उसकी गवाही सबसे महत्वपूर्ण है।
तफ्तीश जारी है और जगेंद्र के घर धरना भी
मंगलवार की सुबह तक उसकी जगेंद्र के बेटे राहुल से फोन पर बात हो रही थी अब उसका फोन स्विच ऑफ है। जगेंद्र की मौत के बाद वह किसी के सामने नहीं आ रही है। उसे अपनी और अपनी दो बेटियों की जान की चिंता सता रही है।
जगेंद्र के बेटे राहुल को संदेह है कि शायद वह भी मंत्री के पक्ष में हो गई है। जगेंद्र के पिता कहते हैं न्याय होगा, मौका आने पर प्रत्यक्षदर्शी भी सामने आएंगे, सच वो है जो जगेंद्र ने अपनी पोस्ट में लिखा है, मंत्री ने अरबों का घोटाला किया है। मेरे बेटे ने पोल खोली तो उसे मार दिया गया।
पुलिस की तफ्तीश जारी है और जगेंद्र के घर धरना भी। खुटार और शाहजहांपुर में इस केस पर सियासत भी जारी है। इस मामले में इतने नाम जुड़ रहे हैं कि तफ्तीश में वक्त लगेगा। फिलहाल तो पुलिस भी मान रही है कि मामला सीबीआई के पास जाएगा।
वैसे भी इस मामले में अब तक पुलिस की जो भूमिका रही है उससे लोगों को पुलिस पर भरोसा भी नहीं रहा। जिंदा जलने या जला देना जगेंद्र की मौत एक सच है लेकिन इस कहानी में कई झूठ भी पिरोए जा रहे हैं, इसलिए सच की गांठ खोलने में जांच एजेंसी को कठिनाई तो होगी।