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अश्लीलता दिखा कर नहीं बटोर सकेंगे टीआरपी

Thu, 26 Sep 2013 11:54 AM IST
दिल्ली
दिल्ली Updated Thu, 26 Sep 2013 11:54 AM IST
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trp will elicit showing pornography
बॉक्स आफिस पर मोटी कमाई और टीआरपी बढ़ाने के लिए फिल्मों, टीवी सीरियलों में अश्लीलता परोसने को लेकर मची होड़ पर कानूनी ब्रेक लग सकता है।
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मानव संसाधन विकास मंत्रालय से संबंधित संसद की स्थायी समिति ने इन्हें इनडीसेंट रिप्रेजेंटेशन ऑफ वुमन (प्रोअबिशन) अमेंडमेंट बिल 2012 के दायरे में इन्हें लाने की सिफारिश की है।

टीवी पर बढ़ती अश्लीलता पर काबू पाने के लिए समिति ने प्रस्तावित संशोधित कानून की नए सिरे से समीक्षा और नियमन की वकालत की गई है।

फिल्मों पर पूरी तरह से इस कानून को लागू करने की सिफारिश भी की गई है। संसदीय समिति ने इस मुद्दे को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के समक्ष भी उठाया है।

दरअसल प्रस्तावित संशोधित विधेयक के दायरे में फिल्म निर्माताओं, निदेशक औरच ट्रेंड बॉडी को लाने पर कोई अस्पष्टता नहीं है। इसलिए समिति ने इस मुद्दे को सही तरीके से विधेयक में पेश करने की सिफारिश की है।
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दूसरी ओर समिति ने सरकार को महिलाओं की अश्लील प्रस्तुति संबंधी दिशा-निर्देश की समीक्षा करने की सलाह भी दी है। समिति ने सिनेमेटोग्राफ कानून और केबल टीवी कानून की अनदेखी पर कड़े कदम उठाने और कानून की अनदेखी पर भारी जुर्माना ठोकने की वकालत भी की है।
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पिछले नौ महीनों में महिलाओं के अश्लील तरह से दिखाने और प्रस्तुत करने पर प्रतिबंध लगाने को लेकर मानव संसाधन विकास मंत्रालय से संबंधित संसद की स्थायी समिति के समक्ष तमाम पक्षकारों से विस्तार में चर्चा की गई।

समिति इस कानून के दायरे में संचार के सभी माध्यमों को लाने के पक्ष में है। समिति का मानना है कि संशोधित कानून की ऐसी व्याख्या होनी चाहिए जिससे अश्लीलता परोसने की कोई गुंजाइश नहीं हो।

इस बाबत समिति ने इंटरनेट और मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया, भारतीय उद्योग परिसंघ, राष्ट्रीय महिला आयोग, वकीलों, भारतीय विज्ञापन संघ से भी सलाह मशविरा लिया है।


पिछले वर्ष 13 दिसंबर 2012 को महिलाओं के अश्लील प्रदर्शन पर रोक लगाने संबंधी बिल को राज्यसभा में पेश किया गया था। जबकि 21 दिसंबर 2012 को इसे मानव संसाधन विकास मंत्रालय से संबंधित संसदीय समिति को समीक्षा के लिए भेज दिया गया था।

इससे पहले संबंधित बिल को 1986 में पेश किया गया था। लेकिन सूचना प्रौद्योगिकी क्रांति आने से संचार के कई माध्यम हो गए हैं।

इसलिए इस कानून का विस्तार केवल प्रिंट मीडिया को प्रतिबंधित करने की जगह संचार के सभी माध्यमों पर लागू करने की सिफारिश की जा रही है।
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