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कट्टरपंथियों पर भारी शहीद-ए-आजम के दीवानों का जज्बा

Sun, 24 Mar 2013 10:52 PM IST
योगेश नारायण दीक्षित/चंडीगढ़
योगेश नारायण दीक्षित/चंडीगढ़ Updated Sun, 24 Mar 2013 10:52 PM IST
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tributes paid to bhagat singh in lahore

पाकिस्तान में शहीद-ए-आजम भगत सिंह के दीवानों का जज्बा लाहौर में उनके नाम पर चौक का विरोध करने वाले कट्टरपंथी संगठनों पर भारी पड़ने लगा है।

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इसका ताजा उदाहरण शनिवार शाम को सामने आया जब लाहौर के ऐतिहासिक शादमान चौक पर शहीद दिवस के मौके पर जुटी पाकिस्तानी कला एवं साहित्य जगत की हस्तियों ने भगत सिंह को श्रद्धांजलि दी और फव्वारा चौक का नामकरण शहीद-ए-आजम पर करने की मांग के समर्थन में नारे लगाए।
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हालांकि एक दिन पहले से ही कट्टरपंथी संगठन भगत सिंह की बरसी पर न जुटने और परिणाम भुगतने की चेतावनी दे रहे थे, लेकिन उसका कोई असर नहीं हुआ।

श्रद्धांजलि समारोह के दौरान भी चंद कट्टरपंथी नारे लगाते चौक तक आए, लेकिन पुलिस और थिएटर-साहित्य की हस्तियों को देखकर उनके तेवर ठंडे हो गए।

लाहौर के वकील और मानवाधिकार कार्यकर्ता ने अमर उजाला को भेजे ई-मेल में जानकारी दी कि चंद कट्टरपंथियों के हंगामे के बावजूद शहीदी दिवस पर पाकिस्तान में उस चौक पर भगत सिंह को श्रद्धांजलि दी गई, जहां 23 मार्च, 1931 को मौजूद जेल में उन्होंने हंसते हुए फांसी के फंदे को चूम लिया था।
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पाकिस्तानी की जानी-मानी थिएटर पर्सनालिटी मदीहा गौहर और सईदा दीप समेत पाक पंजाब में कला और साहित्य से जुड़ी कई हस्तियों ने शहीद-ए-आजम को उनके बलिदान दिवस पर श्रद्धांजलि देने के साथ फव्वारा चौक का नाम भगत सिंह चौक करने के समर्थन में हाथों में बैनर लेकर नारे भी लगाए।

पिछले साल भगत सिंह की जयंती के मौके पर 28 सितंबर को लाहौर के स्थानीय प्रशासन ने फव्वारा चौक का नाम भगत सिंह पर रखने का ऐलान किया था।

लेकिन, कट्टरपंथियों ने इसका विरोध करके आदेश पर रोक के लिए लाहौर हाईकोर्ट में याचिका डाल दी थी।

तब से पाक में भगत सिंह के चाहने वालों ने फव्वारा चौक का नाम उन पर रखने की मुहिम चला रखी है।

-शहीद-ए-आजम के 82वें शहीदी दिवस पर शनिवार को भगत सिंह चौक (फव्वारा चौक) पर श्रद्धांजलि देने पहुंचे पीस एक्टिविस्ट के खिलाफ एक कट्टरपंथी संगठन के  कार्यकर्ताओं ने विरोध शुरू कर दिया। वहां मौजूद पुलिस ने स्थिति नियंत्रित की और लोगों ने उस जगह पर भगत सिंह के सम्मान में कुछ शब्द कहे जहां अंग्रेजों ने उन्हें फांसी दी थी।
ओवैश शेख, लाहौर के वकील और इंडो-पाक पीस इनीशिएटिव एंबेसडर

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